पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह ने BJP से दिया इस्तीफा, राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में लगाए गंभीर आरोप

पटना/दिल्ली: बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और आरा के पूर्व सांसद आर.के. सिंह ने रविवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा और निलंबन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।

आर.के. सिंह का यह कदम पार्टी द्वारा उनके “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निलंबन के 24 घंटे बाद आया है।

“किस पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया, इसकी जानकारी तक नहीं दी गई” — आर.के. सिंह

अपने त्यागपत्र में आर.के. सिंह ने दावा किया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से निलंबन का पत्र मिला, जिसमें पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे गतिविधियाँ क्या थीं।

उन्होंने लिखा—

“मुझे मीडिया के कुछ सदस्यों के जरिए एक पत्र मिला, जिसमें कहा गया कि पार्टी ने मुझे पार्टी-विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया है और पूछा है कि मुझे निष्कासित क्यों न किया जाए। लेकिन पत्र में इन कथित गतिविधियों का ज़िक्र तक नहीं है।”

उन्होंने कहा कि बिना आरोप स्पष्ट किए कारण बताओ नोटिस जारी करना पूरी तरह अनुचित है।

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट का विरोध ही असली वजह?

आर.के. सिंह ने अपने पत्र में संकेत दिया कि कारण बताओ नोटिस शायद उनके हालिया बयान के कारण आया, जिसमें उन्होंने भाजपा और एनडीए में आपराधिक छवि वाले कुछ उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने लिखा—

“शायद कारण बताओ नोटिस की वजह यह है कि मैंने सार्वजनिक रूप से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को टिकट देने का विरोध किया था।”

उनका कहना है कि पार्टी के भीतर इस सवाल को उठाना ‘पार्टी विरोधी गतिविधि’ मान लिया गया।

सम्राट चौधरी और अनंत सिंह पर भी साध चुके थे निशाना

पिछले कई महीनों से आर.के. सिंह, एनडीए और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से खुलकर असहमति जताते रहे हैं।

  • उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ कई बयान दिए
  • जदयू नेता अनंत सिंह की उम्मीदवारी पर भी कड़ा विरोध जताया
  • चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए

भाजपा के भीतर इसे लगातार असंतोष और लाइन से बाहर जाने वाली गतिविधि माना जा रहा था।

NDA की जीत के अगले दिन मिला निलंबन पत्र

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की ऐतिहासिक जीत के ठीक एक दिन बाद भाजपा ने आर.के. सिंह को निलंबित कर दिया था।
हालांकि पार्टी नेताओं ने इस पर कोई अधिकृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई बताया गया।

निलंबन ने पहले ही सियासी हलचल पैदा कर दी थी, जिसे अब उनके इस्तीफे ने और बड़ा रूप दे दिया है।

“मैं औपचारिक रूप से BJP छोड़ रहा हूं” — पत्र का अंत

अपने पत्र के अंत में आर.के. सिंह ने स्पष्ट शब्दों में लिखा—

“मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा देता हूँ।”

एक समय भाजपा के भरोसेमंद चेहरे माने जाने वाले और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री रह चुके आर.के. सिंह का यह कदम पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण: इस्तीफा चुनाव बाद BJP के अंदर असंतोष का संकेत?

राजनीतिक हलकों में आर.के. सिंह का यह कदम भाजपा के भीतर बढ़ते अंदरूनी मतभेद का संकेत माना जा रहा है।
NDA की प्रचंड जीत के बावजूद उम्मीदवार चयन, नेतृत्व शैली और आंतरिक अनुशासन को लेकर कई नेताओं की असंतुष्टि पिछले कुछ समय से सामने आ रही है।

अब आर.के. सिंह का इस्तीफा भाजपा के लिए नई चुनौती बन सकता है, खासकर बिहार में जहां सियासी समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।

WhatsApp Channel VOB का चैनल JOIN करें
  • Related Posts

    बिहार में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज, अश्विनी चौबे ने सरकार को दी नसीहत—“पहले रैन बसेरा बनाइए, फिर गरीबों को हटाइए, अन्याय बर्दाश्त नहीं”

    Continue reading