लोकनायक जयप्रकाश नारायण जयंती पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का आत्मशुद्धि उपवास, संपूर्ण क्रांति पर संगोष्ठी आयोजित

पटना | 11 अक्टूबर 2025: लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 123वीं जयंती पर शनिवार को उनके पटना स्थित आवास महिला चरखा समिति सभागार में “संपूर्ण क्रांति, सशक्त लोकतंत्र और युवा शक्ति” विषय पर संगोष्ठी एवं आत्मशुद्धि उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जेपी सेनानी अश्विनी कुमार चौबे ने लोकतंत्र की पवित्रता और राजनीति में शुचिता के संकल्प के साथ एक दिवसीय आत्मशुद्धि उपवास रखा।


जेपी के विचार आज भी प्रासंगिक — अश्विनी चौबे

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अश्विनी चौबे ने कहा,

“लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती वंशवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति के विरुद्ध नई चेतना का दिवस है। आज जरूरत है कि युवाओं को जेपी के संकल्पों से जोड़कर सशक्त और नैतिक भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाए।”

उन्होंने कहा कि जेपी के आंदोलन ने देश की राजनीति को नई दिशा दी थी और आज के दौर में उनके सिद्धांतों — संपूर्ण क्रांति, सामाजिक न्याय और पारदर्शिता — को फिर से अपनाने की आवश्यकता है।

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जेपी सेनानियों और परिजनों को किया गया सम्मानित

इस अवसर पर अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति संगठन, जेपी सेनानी मंच और लोकतंत्र सेनानी संघ के संयुक्त तत्वावधान में जेपी आंदोलन से जुड़े सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जेपी सेनानी, लोकतंत्र सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा प्रतिनिधि शामिल हुए।


कार्यक्रम में शामिल प्रमुख अतिथि

संगोष्ठी में दिल्ली और अन्य राज्यों से आए गणमान्य अतिथियों में शामिल थे —
पूर्व सांसद कैलाश सोनी, पद्मश्री सुरेन्द्र किशोर, रीता किशोर, डॉ. किरण घई, पद्मश्री विमल जैन, जयप्रकाश महन्थ, डॉ. एम.के. मधु, कमला प्रसाद, और शम्भू प्रसाद सिंह
वहीं स्थानीय स्तर पर विशाल सिंह, मनोज मिश्र, अर्जित चौबे, किरण, इन्दू शरण, हरेन्द्र प्रताप और प्रकाश सहाय सहित बड़ी संख्या में जेपी सेनानी मौजूद रहे।


जेपी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

संगोष्ठी और आत्मशुद्धि उपवास का यह आयोजन लोकनायक जयप्रकाश नारायण के मूल विचारों — संपूर्ण क्रांति, लोकशक्ति, नैतिक राजनीति और सामाजिक पारदर्शिता — को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रतीक बना।
अश्विनी चौबे ने कहा कि यह उपवास केवल आत्मशुद्धि का नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा और लोकशक्ति के प्रति आस्था का प्रतीक है।


 

 

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