HIGHLIGHTS:
- नई कमान: रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बने बिहार के 43वें राज्यपाल।
- शपथ ग्रहण: 14 मार्च को लोकभवन में होगा समारोह; मुख्य न्यायाधीश दिलाएंगे शपथ।
- धमाकेदार स्वागत: एयरपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की फौज ने किया अभिनंदन।
- विरासत: आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे जनरल हसनैन; सेना और शिक्षा जगत का है लंबा अनुभव।
सरहद का रखवाला अब लोकतंत्र की जननी का संरक्षक: पटना में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
पटना: बिहार के राजभवन में अब एक नई और ओजस्वी ऊर्जा का प्रवेश होने जा रहा है। भारतीय सेना की प्रसिद्ध ‘चिनार कोर’ के पूर्व कमांडिंग इन चीफ, रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन गुरुवार को पटना पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए बिहार सरकार के दिग्गजों का जमावड़ा लगा रहा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया। एयरपोर्ट से वे सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।
सेना से शिक्षा और अब राजभवन: एक बहुआयामी व्यक्तित्व
जनरल हसनैन का प्रोफाइल किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सेना में रणनीतिक कौशल दिखाने के साथ-साथ वे शिक्षा के क्षेत्र में भी माहिर रहे हैं:
- चिनार कोर: कश्मीर की संवेदनशील ‘चिनार कोर’ के कमांडर के रूप में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
- शिक्षा जगत: 2018 में वे कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
- बिहार से रिश्ता: अब वे बिहार के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं।
स्वागत में उमड़ा सियासी कुनबा
एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान बिहार सरकार के मंत्रियों की लंबी फेहरिस्त दिखी:
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- मंत्रिमंडल की उपस्थिति: उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खां ने नए राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
- विधानसभा अध्यक्ष का बयान: डॉ. प्रेम कुमार ने कहा, “लोकतंत्र की जननी बिहार की धरती पर एक महान सैन्य नायक का स्वागत है। उनके अनुभव से राज्य को नई दिशा मिलेगी।”
VOB का नजरिया: क्या जनरल का अनुशासन बदलेगा राजभवन की कार्यशैली?
बिहार के राज्यपाल के रूप में एक सैन्य पृष्ठभूमि के व्यक्तित्व का आना बड़े संकेत देता है। सैयद अता हसनैन को रणनीतिक मामलों और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों का गहरा अनुभव है। आरिफ मोहम्मद खान के बाद उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार बिहार में एक मजबूत और अनुभवी नेतृत्व चाहती है। विशेष रूप से उच्च शिक्षा (कुलपति के रूप में उनके अनुभव) के क्षेत्र में बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।


