बाढ़ सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति, बैग पीचिंग में बालू की बजाय भरी जा रही मिट्टी को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन

राजधानी पटना से मसौढ़ी में जिलाधिकारी के निर्देश पर तटबंध मरम्मती और कटावरोधी कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. ऐसे में मसौढ़ी प्रखंड के देवरिया पंचायत के खैनिया गांव में बाढ़ से सुरक्षा को लेकर कटावरोधी कार्य में खानापूर्ति देखा जा रहा है. दरअसल तटबंध किनार पर बैग पिचिंग को लेकर बैग में बालू के बजाय मिट्टी भरा जा रहा है. इसे लेकर ग्रामीणों ने सरकारी राशि का दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए घंटो विरोध प्रदर्शन किया है।

पत्थर के बोल्डर पीचिंग की मांग: इसके अलावा ग्रामीणों ने कहा कि पिछले साल भी तटबंध के किनार पर पत्थर का बोल्डर लगाने की बात हुई थी लेकिन हर साल बैग लगाकर तटबंध का खानापूर्ति किया जाती है. जो सफल नहीं होता है हर साल वह बैग कटकर नदी में विलीन हो जाता है. प्रत्येक साल बाढ़ कटावरोधी के नाम पर ठेकेदार लाखों रुपए की निकासी करता है. ऐसे में ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि तटबंध के किनारे पत्थर का बोल्डर पीचिंग किया जाए ताकि इसका स्थाई निदान हो सके।

बैग में 70% से अधिक होना चाहिए बालू: कटावरोधी कार्य में बालू के बजाय मिट्टी भरने के मामले में एसडीएम प्रीति कुमारी ने कहा कि यह ठेकेदार की लापरवाही है. अनियमितता बरतने पर ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं बाढ़ नियंत्रण के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि बैग पीचिंग कार्य में बैग में 70% से अधिक बालू भरा जाना चाहिए. तभी वह बालू बैग टीक पाएगा. यह संवेदक की लापरवाही है. जूनियर इंजीनियर से उसकी जांच करवाई जाएगी।

बैग पिचिंग को लेकर बैग में बालू के बजाय मिट्टी भरने का मामला सामने आया है. जो ठेकेदार की लापरवाही है. अनियमितता बरतने पर ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.” – प्रीति कुमारी, एसडीएम मसौढ़ी

तटबंध किनार पर बैग पिचिंग को लेकर बैग में बालू के बजाय मिट्टी भरी जा रही है. कटावरोधी कार्य में खानापूर्ति काम किया जा रहा है. जिससे हर साल वह बैग कटकर नदी में विलीन हो जाता है.”- राजमणि देवी, स्थानीय

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