रांची। चारा घोटाले के देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सजा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर सीबीआई की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। बुधवार को जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए आगे की सुनवाई की अनुमति दे दी।
लालू प्रसाद को इस मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 जनवरी 2018 को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। जबकि इसी मामले में दोषी ठहराए गए एक अन्य आरोपी जगदीश शर्मा को भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत सात साल की सजा और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी गई थी।
सीबीआई ने हाईकोर्ट में यह तर्क दिया कि जिस अपराध में लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपियों को साढ़े तीन साल की सजा दी गई, उसी में जगदीश शर्मा को अधिक कठोर दंड दिया गया। इस आधार पर लालू प्रसाद की सजा भी बढ़ाई जानी चाहिए।
एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया कि निचली अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि चारा घोटाला लालू प्रसाद के संरक्षण में ही अंजाम दिया गया। एजेंसी ने यह भी जानकारी दी कि मामले में शामिल तीन अन्य आरोपी — आर. के. राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद — की मृत्यु हो चुकी है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने इन तीनों के नाम याचिका से हटाते हुए शेष आरोपियों के विरुद्ध सीबीआई की अपील को सुनवाई योग्य मान लिया है।
गौरतलब है कि यह मामला चारा घोटाले के सबसे चर्चित मामलों में से एक है, जिसमें देवघर कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी।


