पटना:
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में कथा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्ग है, जिसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और मुक्ति की त्रिवेणी का संगम होता है।
कथा के पहले दिन व्यास पीठ से यह संदेश दिया गया कि श्रीमद्भागवत कथा देवलोक के अमृत से भी श्रेष्ठ है। कथा में बताया गया कि जब राजा परीक्षित को श्राप मिला, तब देवता अमृत का कलश लेकर गंगा तट पर पहुंचे और सुखदेव जी से निवेदन किया कि वे वह अमृत राजा परीक्षित को पिला दें। इसके बदले देवताओं ने श्रीमद्भागवत कथा का अमृत स्वयं पीने की इच्छा जताई।
भागवत कथा खरीदी नहीं जा सकती – सुखदेव जी
कथा में यह प्रसंग भी बताया गया कि सुखदेव जी ने देवताओं के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि भागवत कथा खरीदी नहीं जा सकती। यह किसी मूल्य या सौदे की वस्तु नहीं, बल्कि भगवान की कृपा से प्राप्त होने वाला दिव्य ग्रंथ है। भागवत कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और अंततः मुक्ति की प्राप्ति होती है।
धुंधकारी प्रसंग से मिला जीवन का संदेश
प्रथम दिवस की कथा में धुंधकारी नामक पात्र का उल्लेख भी किया गया, जिसने जीवन में अनेक पाप किए और मृत्यु के बाद प्रेत योनि में चला गया। कथा के अनुसार, जब धुंधकारी के भाई ने उसे सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया, तो उस प्रेत आत्मा को भी मुक्ति प्राप्त हुई। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि श्रीमद्भागवत कथा में सभी पापों से उद्धार करने की शक्ति है।
मनुष्य देह का सदुपयोग करने का आह्वान
वक्ताओं ने कहा कि परमात्मा की कृपा से प्राप्त मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसका सदुपयोग कर भागवत कथा के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। कथा श्रवण से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं।
आस्था और विश्वास पर जोर
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि लोगों को ईश्वर और आस्था में विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा,
“भागवत कथा सुनने मात्र से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं और महादेव के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।”
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में जय श्री राधे, जय श्री कृष्ण के जयघोष गूंजते रहे और भक्तिमय माहौल बना रहा।


