गैस सप्लाई पर संकट की आशंका: केंद्र ने लागू किया ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट’, बिहार समेत कई राज्यों में प्रशासन अलर्ट

देश में एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की संभावित कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच यह फैसला लिया गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

दरअसल, मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलमार्ग के जरिए होने वाली ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधा के कारण पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क रहने और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है।

कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर असर

गैस की संभावित किल्लत को देखते हुए कई राज्यों में फिलहाल कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई अस्थायी रूप से सीमित कर दी गई है। बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयोग होने वाले कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पर रोक या कटौती की खबरें सामने आई हैं।

बिहार में प्रतिदिन लगभग ढाई लाख गैस सिलेंडर की आपूर्ति होती है। इनमें से करीब 12 हजार से अधिक सिलेंडर कॉमर्शियल उपयोग के लिए होटल, रेस्टोरेंट, स्कूल और हॉस्टल जैसे संस्थानों को भेजे जाते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए इन कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल रोकी गई है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से इन सिलेंडरों की डिलीवरी प्रभावित है और एजेंसियां अपने पास उपलब्ध स्टॉक से ही काम चला रही हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं में बढ़ी चिंता

कॉमर्शियल गैस की कमी की खबर सामने आने के बाद कई जिलों में घरेलू उपभोक्ताओं के बीच भी चिंता बढ़ गई है। बिहार के गोपालगंज, आरा, दरभंगा, अररिया, बेतिया, पूर्णिया और सुपौल समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ देखने को मिली। कई उपभोक्ता समय से पहले गैस बुकिंग कराने लगे हैं, जिससे एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराहट में बुकिंग न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है और आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

DIG ने अधिकारियों को जारी किया अलर्ट

स्थिति को देखते हुए स्पेशल ब्रांच के डीआईजी ने राज्य के सभी डिविजनल कमिश्नर, रेंज के आईजी और डीआईजी, साथ ही जिलों के डीएम और एसपी को अलर्ट लेटर जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

लेटर में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ बढ़ सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने का खतरा भी हो सकता है। इसलिए जिला प्रशासन और पुलिस को स्थिति पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।

अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि गैस एजेंसियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और पेट्रोल पंपों पर स्टॉक की नियमित जांच की जाए। जमाखोरी या कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट

एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसके जरिए सरकार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई, वितरण और कीमतों को नियंत्रित कर सकती है। जब किसी जरूरी वस्तु की कमी होने लगती है या उसकी कीमतों में असामान्य वृद्धि होती है, तब सरकार इस कानून के तहत व्यापारियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के स्टॉक पर सीमा तय कर सकती है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना और आम लोगों तक आवश्यक वस्तुएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराना है। एलपीजी गैस जैसे आवश्यक संसाधनों की कमी की स्थिति में यह कानून बाजार में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

सरकार और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में जरूरत से ज्यादा गैस बुकिंग या स्टॉक करने से बचें। साथ ही किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि आम उपभोक्ताओं को गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता में किसी तरह की समस्या न हो।

फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने, बाजार में स्थिरता बनाए रखने और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने पर है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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