पिता ने जुड़वां बच्चों को घोड़े पर बैठाकर भेजा स्कूल, देखने वाले ताली बजाते रहे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में एक पिता की पहल सुर्खियों में हैं. यह चर्चा वाकई लाजिमी है, क्योंकि इस पिता ने अपने जुड़वां बच्चों को स्कूल के पहले दिन उनके पसंदीदा वाहन घोड़े पर बैठाकर भेजा. इस अनोखी पहल ने यह साबित कर दिया कि दुनिया में औलाद से बड़ी कोई दौलत नहीं होती.

बच्चे को घोड़े पर बैठाकर भेजा स्कूल: नालंदा के बिहारशरीफ स्थित कमरुद्दीन गंज मोहल्ले में रहने वाले इस पिता ने न केवल अपने बच्चों के स्कूल जाने का तरीका खास बनाया, बल्कि यह भी दिखाया कि वह अपनी संतान की खुशी और शिक्षा के प्रति प्रेरणा को कितना महत्व देते हैं, बच्चों का स्कूल के पहले दिन इस तरह से स्वागत करना और उन्हें घोड़े पर भेजना शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

पिता ने ख्वाहिश की पूरी: पिता अजीत कुमार पेशे से इंजीनियर हैं तो मां सरकारी स्कूल की शिक्षिका हैं. अजित कुमार वर्ष 2021 में जुड़वा बच्चों के पिता बने हैं. जन्म के बाद जुड़वा भाइयों का नाम असीम आनंद व आनंद रौनक हैं. फिलहाल वे गल्फ में कार्यरत हैं. पिता की हार्दिक इच्छा थी कि वह अपने दोनों जुड़वा पुत्रों को स्कूल के पहले दिन घोड़े पर बैठा कर भेजें. उन्होंने वैसा ही किया.

ताली बजाकर किया अभिवादन: जब दोनों सगे भाई दुल्हन की तरह सजे दो अलग-अलग घोड़े पर बैठकर घर से स्कूल की ओर निकले तो इस अनोखी पहल ने न केवल बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित किया, बल्कि उनके इस खास सफर को देखने वाले लोग भी अभिभूत हो गए. बच्चों को घोड़े पर देख आसपास के लोग ताली बजाकर उनका अभिवादन करने लगे और यह दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया. लोगों ने कहा कि इससे दोनों बच्चों का मनोबल बढ़ेगा. दोनों बच्चे अपनी पूरी जिंदगी इस दृश्य को नहीं भूल पायेंगे.

“मेरा मकसद यह भी है कि मेरे दोनों जुड़वा पुत्र जब बड़े हो जायें तो वे अपने दोस्तों को बताएं कि उनके पिता ने शिक्षा के लिए घोड़े पर सवार कर स्कूल पहुंचाया था.”– अजीत कुमार, पिता

हाथी नहीं मिला तो घोड़े से भेजा स्कूल: पिता अजीत कुमार कहते हैं कि उनकी इच्छा हाथी पर बैठाकर स्कूल भेजने की थी, लेकिन महावत की व्यवस्था नहीं हो सकी. बच्चों का मस्तक काफी कोमल होता है. पिता के इस प्रयास को वह कभी भूल नहीं सकते हैं. वह पूरी जिंदगी अपने पिता के प्रति लगाव रखेंगे. जिससे उनके जीवन पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. शिक्षा को लेकर पिता का मार्गदर्शन उन्हें जीवन में बेहतर करने को लेकर प्रेरित करेगा.

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