पिता 25 साल से लगा रहे चाट-पकौड़ी का ठेला, मेहनत के दमपर Dipesh Kumari ने UPSC में 93वीं रैंक लाकर बनी IAS

मन में सच्ची लगन हो तो लक्ष्य के आगे आने वाली हर मुसीबत छोटी लगती है. मजबूत इच्छाशक्ति वाले इंसान बहाना नहीं बनाते वो रास्ते खोजते हैं और मेहनत के दम पर आगे बढ़ते हैं. आज एक ऐसी ही बेटी की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसने अपने लक्ष्य के आगे ना आर्थिक तंगी देखी ना अन्य परेशानियां. वो बस आगे बढ़ती रही. और उसकी इसी मजबूत इच्छाशक्ति ने उसे IAS बना दिया.

कौन हैं IAS दीपेश कुमारी (Dipesh Kumari)?

संघर्ष से कामयाबी तक की ये कहानी शुरू हुई राजस्थान (Rajasthan) के भरतपुर (Bharatpur) के अटल बंद क्षेत्र में कंकड़ वाली कुईया निवासी गोविंद के घर से. गोविंद बीते 25 सालों से ठेले पर भाजिया पकौड़ी बेच कर अपने पांच बच्चों और बीवी का पालन-पोषण कर रहे थे. घर के नाम पर एक कमरा था जिसमें पूरा परिवार यानी सात सदस्य रहते थे.

रसोई के नाम पर इसी कमरे के एक कोने में गैस रखी रहती थी. गोविंद पकौड़ी बेच कर ही अपनी दो बेटियों और तीन बेटों को पढ़ा रहे थे. घर में आर्थिक अंधेरा जरूर था लेकिन उनके बच्चों में उन्हें हमेशा उम्मीद की लौ दिखती थी. उनकी ये उम्मीद उस समय सच हो गई जब उनकी बेटी दीपेश कुमारी विपरीत परिस्थितियों में भी कठिन परिश्रम कर यूपीएससी 2021 में 93वी रैंक हासिल कर IAS अफसर बन गई.

बेटी के अफसर बनने के बाद भी लगाते रहे ठेला

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बेटी अफसर बनी तो तो पकौड़ी का ठेला लगाने वाले गोविंद भी हर पिता की तरह बेटी की कामयाबी पर खूब खुश हुए लेकिन उन्होंने अपनी खुद्दारी नहीं छोड़ी. अमूमन बच्चे को ऐसा पड़ मिलने के बाद हर माता-पिता सोचते हैं कि अब उनके संकट की घड़ी कट गई. अब वो ऐसा वैसा कोई काम नहीं करेंगे, बस आराम करेंगे. मगर गोविंद ने ना तो बेटी के अफसर बनने पर घमंड किया और ना अपना काम छोड़ा. जिस दिन बेटी का परिणाम घोषित हुआ और उसके अफसर बनने की बट सामने आई उसके अगले दिन भी हमेशा की तरह गोविंद अपना ठेला लेकर पकौड़ी बेचने निकल पड़े.

IAS दीपेश कुमारी के परिवार में कौन-कौन हैं?

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दीपेश कुमारी अपने सभी भाई बहनों में बड़ी हैं. वह हमेशा से पढ़ाई में होशियार रहीं. दसवीं तक की पढ़ाई उन्होंने भरतपुर शहर के ही शिशु आदर्श विद्या मंदिर से की. दीपेश कुमारी ने दसवीं कक्षा 98% अंकों के साथ और 12वीं कक्षा 89% अंक प्राप्त किये. इसके बाद उन्होंने जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की और फिर आईआईटी मुंबई से एमटेक की पढ़ाई की. दीपेश कुमारी ने दिल्ली से यूपीएससी की तैयारी की और दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 93वीं रैंक प्राप्त कर ली.

दीपेश के अन्य भाई बहन क्या करते हैं?

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दीपेश कुमारी के दो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं उनकी एक बहन चिकित्सक है. एक बेटा उनके काम में उनका हाथ बंटाता है. दीपेश के पिता ने बेटी की सफलता के बाद कहा था कि इंसान को पुराने दिनों को कभी भी नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई, लेकिन उसके बावजूद भी वह चाट पकौड़ी का ठेला लगाते हैं. छोटे से मकान में रहकर सभी बच्चों ने शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद तैयारी करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर चले गए. लेकिन गोविंद प्रसाद आज भी छोटे से मकान में रहकर अपना रोजगार चला रहे हैं.

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