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धान की खेती छोड़कर मखाना की खेती कर रहे बिहार के किसान, दो हजार हेक्‍टेयर में लगा मखाना

ByRajkumar Raju

May 12, 2022

पूर्णिया प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चांदी, रजीगंज, डिमीया छतरजान, बियारपुर, रामपुर, गौरा, विक्रमपुर, महाराजपुर, भोगा करियात, हरदा, कवैया पंचायतों में मखाने की खेती इस वर्ष बड़े पैमाने पर की जा रही है। किसान धान की खेती छोड़ मखाने की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। धान के अपेक्षा मखाने में अधिक मुनाफा हो रहा है।

इस वर्ष प्रखंड क्षेत्र में लगभग 2 हजार हेक्टेयर जमीन पर मखाना की खेती हो रही है। वैसे मखाने की खेती बहुत रिस्क वाली खेती होती है।मखाने की खेती के लिए मनरेगा द्वारा किसानों को खेत तैयार करने में काफी मदद मिल रही है। मखाना की बुआई कीचड़युक्त जमीन में की जाती है। जैसे जैसे पौधा बढ़ता है उस तरह उसमें पानी दिया जाता है। अगर पानी की कमी हो तो पौधा के जलने का डर रहता है। पूर्णिया पूर्व के किसान बड़े पैमाने पर मखाना की खेती कर रहे हैं। हालांकि मक्का का खेती भी प्रखंड क्षेत्र में वृहत पैमाने पर हो रही है।

मखाने की खेती करने वाले किसान बिनय साह, सुरेश मेहता, दिलीप महलदार ने बताया कि पिछले सीजन में मखाने की खेती की थी तो फायदा हुआ था।यही सोच कर इस सीजन में भी ज्यादा जमीन पर मखाने की बुआई किए हैं। उन्होंने बताया कि इसकी खेती निचले गड्ढायुक्त जमीन में की जाती है। इससे पानी की कम आवश्यकता होती है एवं बरसात के दिनों में इसे पानी की पूर्ति हो जाती है।अगर सरकार की ओर योजना चलाई जाए तो इस खेती को और बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि मखाने की खेती में कम लागत में ज्यादा मुनाफा होता है।वहीं पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के किसान पंचानंद पोद्दार, इस्राइल आलम, संतोष चौधरी, किशोर साह कहते हैं कि पहले धान की फसल खेतों में लगाते थे लेकिन मुनाफा कम होता था।जबसे मखाने की खेती शुरू की है तबसे हमारे घरों में खुशहाली आई है। हलांकि समयके बदलाव के साथ हमलोग भी अब आधुनिक तरीके से मखाना का खेती करना शुरू कर दिये हैं।समय समय पर उर्वरक व पानी का विशेष ध्यान देना पड़ता है।जिससे उपज ज्यादा होती है।

साथ हीं किसानों ने बताया सरकार को मखाने की खेती करने वाले किसानों पर ध्यान देनी चाहिए,चुकी डीजल का मूल्य में प्रतिदिन वृद्धि हो रहा है।इस धूप में खेतों में लगातार पानी की कमी होने के करण पंप सेट के माध्यम से पानी पटवन करना पड़ता है।जिससे खेती में ज्यादा लागत लग रहा है।

वहीं कृषि सलाहकार संजीव सिंह बताते हैं कि हमलोगों के द्वारा भी किसानों को मखाना खेती करने के लिए प्रेरित किया जाता है। अगर किसान सही तरीके से मखाना का खेती करे तो एक एकड़ जमीन में लगभग 25 से 30 हजार रु लागत पूंजी लगती है।अगर बाजार भाव सही रहा तो 50 से 60 हजार रुपया प्रति एकड़ कमाई हो सकता है।

…..क्या कहते हैं अधिकारी

मखाने की खेती के लिए जिला उद्यान विभाग के द्वारा प्रखंड क्षेत्र के कुछ चयनित किसानों को अनुदान भी मिला था।हलांकि वर्तमान में कृषि विभाग द्वारा मखाने की खेती करने वाले किसानों को लाभ नही मिल पा रहा है।लेकिन काफी खुशी की बात है कि प्रखंड क्षेत्र के किसान वृहत पैमाने पर इस बार मखाना का खेती कर रहे हैं।

एजाज अहमद,प्रखंड कृषि पदाधिकारी