भागलपुर (पीरपैंती)।पीरपैंती प्रखंड के कुंजबन्ना गांव में किसान चेतना एवं उद्यान समिति की एक अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष श्रवण सिंह ने की। इसमें दर्जनों किसानों ने हिस्सा लेकर अडानी पावर प्लांट से जुड़ी समस्याओं और मांगों को एकजुट होकर उठाया।
विकास का स्वागत, लेकिन अधिकारों की गारंटी जरूरी
बैठक में हरिनकोल पंचायत के मुखिया दीपक सिंह और भूमि दाता सुशील सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा की। किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे पीरपैंती में पावर प्लांट के निर्माण का स्वागत करते हैं, लेकिन जिला प्रशासन को यह साफ करना चाहिए कि स्थानीय किसानों और भूमि दाताओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी।
फसल या मुआवजा—एक तो मिले
किसानों ने मांग की कि जिन अधिग्रहित जमीनों पर अभी फसल खड़ी है, उन्हें काटने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। यदि समय नहीं दिया जाता है, तो फसल का उचित मुआवजा अनिवार्य रूप से मिले, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
अधिग्रहण दर में विसंगति दूर हो
मुखिया दीपक सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की कि भूमि अधिग्रहण की दरों में विसंगतियां जल्द दूर की जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की आंखों के सामने फसल नष्ट हो रही है—यदि समय या मुआवजा नहीं मिला, तो वे भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
जन सुनवाई पर सवाल
समिति अध्यक्ष श्रवण सिंह ने आरोप लगाया कि जन सुनवाई के दौरान भारी लापरवाही हुई और कई किसानों को अंदर प्रवेश तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब पूरी जमीन पावर प्लांट में जा रही है, तो किसानों को रोजगार की ठोस गारंटी मिलनी चाहिए।
एक समान दर और साझा समाधान
भूमि दाता सुशील सिंह ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि पावर प्लांट के अधिकारी और भूमि दाता एक साथ बैठकर किसानों की समस्याओं का समाधान करें और सभी को एक समान दर दी जाए। उन्होंने जन सुनवाई के दिन किसान नेताओं को रोके जाने पर भी नाराजगी जताई।
निष्कर्ष:
किसानों ने स्पष्ट कहा—पावर प्लांट से खुशी है, लेकिन यह खुशी तभी पूरी होगी जब उनकी समस्याओं का न्यायसंगत समाधान होगा।


