गया में स्वीट कॉर्न की खेती के प्रशिक्षण से किसानों को मिल रहा आर्थिक लाभ

गया जिले में कृषि विभाग ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक अनूठी पहल की है. यहां किसानों को स्वीट कॉर्न की खेती के लिए जागरूक और प्रशिक्षित किया जा रहा है. जिला कृषि विभाग और आत्मा गया के सहयोग से किसानों को छह सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. इस प्रशिक्षण में किसानों को स्वीट कॉर्न की खेती के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाती है, जिससे वे इस फसल को कुशलता से उगा सकें. स्वीट कॉर्न, जिसे मीठी मक्का भी कहा जाता है, एक विशेष प्रकार की मक्का है जिसे दूधिया अवस्था में ही तोड़ा जाता है. यह पोषण से भरपूर होता है और इसे सेंककर, उबालकर या अन्य व्यंजनों में उपयोग किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह किसानों के लिए एक अच्छा आमदनी का जरिया बन सकता है.

गया जिले के जिला कृषि पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों से जिले में स्वीट कॉर्न की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके तहत 24 प्रखंडों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया, जहां 25 किसानों को एक एकड़ भूमि में डेमोंस्ट्रेशन के जरिए प्रशिक्षण दिया गया. किसानों को बताया गया कि स्वीट कॉर्न की खेती से 70-75 दिनों में फसल तैयार हो जाती है और इसके पौधे का उपयोग हरे चारे के रूप में भी किया जा सकता है.

इस वर्ष जिले के 10 प्रखंडों में किसानों ने स्वीट कॉर्न के बीज की मांग की, जिसके तहत प्रति एकड़ 4 किलो बीज उपलब्ध कराया गया. प्रशिक्षण प्राप्त किसानों को दिल्ली स्थित आईसीआर संस्थान में भी प्रशिक्षण के लिए भेजने की योजना बनाई गई है. पिछले वर्ष मार्केटिंग में आई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला कृषि विभाग ने किसानों को सेलर्स और बायर्स से जोड़ने के लिए विशेष बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है. इससे किसानों को अपनी फसल के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा. साथ ही स्वीट कॉर्न की खेती से किसानों को न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि इससे उन्हें अपने परिवार की आजीविका सुधारने का भी अवसर मिल रहा है. जिला कृषि विभाग की यह पहल किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है.

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