कोलकाता, 23 मार्च 2026: भारतीय रेल में यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अनुभवों, यादों और भावनाओं से जुड़ी एक विशेष यात्रा होती है। खिड़की के पास बैठकर चाय की चुस्की लेना, झालमुड़ी या अन्य स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना—ये सभी पल यात्रा को यादगार बनाते हैं। लेकिन इन छोटे-छोटे आनंद के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल अक्सर नजरअंदाज हो जाता है—हम अपने द्वारा उत्पन्न कचरे का क्या करते हैं?
यात्रा के दौरान कई यात्री अनजाने में या लापरवाहीवश कचरा ट्रेन के डिब्बों, प्लेटफॉर्म या रेलवे ट्रैक पर फेंक देते हैं। यह न केवल वातावरण को गंदा करता है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों, विशेष रूप से सफाईकर्मियों के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है।
रेलवे के सफाई एवं हाउसकीपिंग कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके रेलवे परिसरों को साफ-सुथरा बनाए रखते हैं। वे अक्सर अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक पर जमा कचरे को हटाते हैं, जबकि ट्रेनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में हर अतिरिक्त मिनट, जो वे ट्रैक पर बिताते हैं, उनके जीवन के लिए जोखिम बढ़ाता है।
यह समझना जरूरी है कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। आपकी एक छोटी सी जागरूकता किसी सफाईकर्मी की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर सकती है, जहाँ उनका परिवार उनकी प्रतीक्षा करता है।
कानूनी प्रावधान और दंडात्मक कार्रवाई
भारतीय रेलवे में स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम और कानून बनाए गए हैं। रेलवे परिसर में कचरा फैलाना, थूकना या अस्वच्छता फैलाना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में यात्रियों पर ₹500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- रेलवे ट्रैक, प्लेटफॉर्म या ट्रेन के डिब्बों में कचरा फेंकना, थूकना, पेशाब या शौच करना प्रतिबंधित है।
- यह नियम पूरे रेलवे परिसर पर लागू होता है, जिसमें स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रैक शामिल हैं।
- उल्लंघन करने पर निर्धारित नियमों के अनुसार जुर्माना लगाया जाता है।
- रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अधिकृत कर्मचारी इन नियमों को लागू कराने के लिए अधिकृत हैं।
विक्रेताओं की भूमिका भी अहम
रेलवे परिसरों में कार्यरत अधिकृत विक्रेताओं और खानपान सेवा प्रदाताओं के लिए कूड़ेदान उपलब्ध कराना और कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन करने पर उन पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सख्ती के आंकड़े भी दे रहे हैं संदेश
वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के दौरान पूर्व रेलवे के आरपीएफ द्वारा स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के लिए 6,20,905 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और ₹1,21,59,900 का जुर्माना वसूला गया। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि रेलवे स्वच्छता के प्रति गंभीर है और नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
जन आंदोलन बने स्वच्छता अभियान
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर ने सभी यात्रियों, विक्रेताओं और हितधारकों से अपील की है कि वे रेलवे को कूड़ा-मुक्त बनाने के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उनका कहना है कि जब तक सभी लोग मिलकर स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानेंगे, तब तक कोई भी नियम या दंड व्यवस्था इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकती।
निष्कर्ष
स्वच्छता एक आदत ही नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, जो हमारी यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाती है। अगली बार जब आप ट्रेन में सफर करें, तो यह सुनिश्चित करें कि आपका कचरा सही स्थान पर ही जाए। क्योंकि आपकी छोटी सी जिम्मेदारी, किसी की जिंदगी बचा सकती है और पूरे समाज को स्वच्छ बना सकती है।


