बिहार के जमुई जिले में नकली दवाइयों के बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खैरा थाना क्षेत्र के चौहानडीह गांव स्थित एक मकान से भारी मात्रा में नकली कफ सिरप, बुखार की दवाइयां, पैकिंग सामग्री, खाली शीशियां, रैपर और निर्माण में प्रयुक्त मशीनें बरामद की गई हैं। इस अवैध कारोबार से जुड़ी सामग्रियों की कुल कीमत लाखों रुपये में आंकी गई है।
गुप्त सूचना पर पुलिस की छापेमारी
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चौहानडीह गांव में गोदाम की आड़ में नकली दवाइयों का निर्माण किया जा रहा है। सूचना के बाद खैरा थाना पुलिस और जिला औषधि निरीक्षक की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। मौके पर पहुंचते ही पुलिस ने एक मकान से दवा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और मशीनों को जब्त किया।
एसडीपीओ सतीश सुमन ने बताया:
“गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, रैपर, खाली बोतलें और मशीनें बरामद हुई हैं। जांच के बाद गिरोह में शामिल लोगों की संख्या और नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।“
दवाएं बाजार में भेजने की थी तैयारी
मौके से कुछ दवाइयाँ तैयार हालत में मिलीं जबकि कई अर्धनिर्मित अवस्था में थीं। इससे स्पष्ट है कि इन नकली दवाओं को बाजार में खपाने की तैयारी थी। पुलिस ने बरामद दवाओं को ट्रैक्टर में लादकर थाना भेज दिया है।
औषधि निरीक्षक की उपस्थिति में जांच शुरू
छापेमारी के बाद औषधि निरीक्षक को बुलाकर पूरे परिसर की बारीकी से जांच की गई। प्राथमिक जांच से स्पष्ट हुआ कि यह मकान लंबे समय से नकली दवाओं के निर्माण के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। पड़ोसियों से पूछताछ भी की गई है।
जांच के दायरे में मकान मालिक
फिलहाल मकान मालिक और इस कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो राज्यभर में नकली दवाइयां सप्लाई कर रहा था।
स्वास्थ्य के लिए खतरा बना यह कारोबार
नकली दवाइयों का यह कारोबार न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि लाखों लोगों की जान के लिए खतरा भी है। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण की भूमिका अब विशेष रूप से अहम हो गई है।
जमुई में नकली दवाइयों के बड़े जखीरे की बरामदगी प्रशासन की सक्रियता और सतर्कता का परिणाम है। फिलहाल गिरोह के सरगना, सप्लाई चेन और ग्राहकों की तलाश जारी है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के विस्तार और गहराई का खुलासा होने की संभावना है।


