ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 72 वर्षीय बुजुर्ग कारोबारी से करीब 1.30 करोड़ रुपये ठग लिए। इस वारदात ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर कर दिया है।
20 दिनों तक बनाया मानसिक दबाव का शिकार
सूरजपुर निवासी दिलीप कुमार दास को ठगों ने करीब 20 दिनों तक अपने जाल में फंसे रखा। शुरुआत एक फोन कॉल से हुई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया। उसने कहा कि पीड़ित के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हो रहा है और यदि सहयोग नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई होगी।
वीडियो कॉल पर ‘नकली कोर्ट’ का खेल
कुछ समय बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति जज की कुर्सी पर बैठा नजर आया, जबकि दूसरा पुलिस वर्दी में था। इस पूरी साजिश के जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और जांच जारी है। उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया और घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई।
जांच के नाम पर कराए गए ट्रांसफर
ठगों ने बुजुर्ग से कहा कि उनके बैंक खातों की जांच की जा रही है और सत्यापन के लिए पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने होंगे। यह भरोसा भी दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम लौटा दी जाएगी। डर और दबाव के चलते पीड़ित ने कई किस्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।
किस्तों में निकाले गए करोड़ों रुपये
पीड़ित के अनुसार, 13 फरवरी को 51.95 लाख रुपये, 19 फरवरी को 48.95 लाख रुपये, 21 फरवरी को 10.95 लाख रुपये, 25 फरवरी को 17.20 लाख रुपये और 26 फरवरी को 56,962 रुपये ट्रांसफर कराए गए। इस तरह कुल मिलाकर 1.29 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई।
फर्जी दस्तावेज से भी दिया झांसा
ठगों ने भरोसा बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से फर्जी दस्तावेज भी भेजे। इसमें ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ दिखाकर कहा गया कि जल्द ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। लेकिन काफी समय बीतने के बाद जब पैसे नहीं लौटे, तब जाकर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
साइबर थाना में केस दर्ज, जांच शुरू
पीड़ित ने 12 मार्च को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सेक्टर-36 साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए।
पुलिस की चेतावनी: ऐसे जाल से रहें सावधान
साइबर सेल अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति डर या दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का ट्रेंड?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें अपराधी लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक रूप से नियंत्रित करते हैं और उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं। इस तरह के मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।


