
छपरा (सारण)। सूट-बूट में, कॉन्फिडेंस हाई और पहचान IAS की… लेकिन कहानी 20 मिनट भी नहीं टिक पाई। सारण जिले में एक युवक ने खुद को मेरठ का नगर आयुक्त बताकर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से मिलने की कोशिश की—और वहीं उसकी पोल खुल गई। आरोपी की पहचान रितेश कुमार (निवासी—बसाढ़ी) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज कर लिया है।
कैसे खुली चाल?
रितेश ने खुद को DM का बैचमेट बताया और बड़े आत्मविश्वास के साथ बातचीत शुरू की। लेकिन जैसे ही डीएम ने पोस्टिंग, कैडर और पहचान से जुड़े सवाल पूछे, उसकी कहानी लड़खड़ा गई। पहचान पत्र और आधिकारिक विवरण वह नहीं दिखा सका। शक गहराते ही डीएम ने सुरक्षा को बुलाया—और 20 मिनट में फर्जीवाड़ा बेनकाब हो गया।
नगर थाना में पूछताछ
- रितेश को नगर थाना लाया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है।
- पुलिस की प्राथमिक जांच में साफ हुआ कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं है।
- डीएम के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पहले भी खेल चुका है यही ‘रोल’
सूत्रों के मुताबिक, रितेश इससे पहले भी खुद को IAS बताकर पूर्व डीएम और वरिष्ठ अधिकारियों से मिल चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह अलग-अलग दफ्तरों में जाकर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करता रहा है।
आरोपी का दावा
पूछताछ में रितेश ने कहा कि “परिवार से जुड़े कुछ मामलों में मदद” के लिए वह डीएम से मिलने आया था। अब वह खुद को निर्दोष बताकर माफी मांग रहा है—लेकिन पुलिस उसके पुराने संपर्कों और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है।
पुलिस क्या कहती है?
जिलाधिकारी के निर्देश पर दर्ज केस में धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और जालसाजी की धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस उसके नेटवर्क और पहले के कारनामों की गहन जांच कर रही है।
निष्कर्ष:
सूट-बूट और रौब से बनी नकली पहचान ज्यादा देर नहीं चलती—छपरा में नकली IAS का यह खेल 20 मिनट में फुस्स हो गया।


