मधुबनी में ‘नकली नोटों’ की फैक्ट्री का भंडाफोड़! नालंदा से गया और नेपाल तक फैला था जाली करेंसी का सिंडिकेट; ₹6.44 लाख के साथ प्रिंटर जब्त

HIGHLIGHTS: स्टेशन पर बिछा जाल, गया में टूटी ‘ट्रेजरी’; अर्थव्यवस्था पर चोट करने वाली बड़ी साजिश नाकाम

  • बड़ी बरामदगी: मधुबनी पुलिस ने जब्त किए ₹6,44,000 के जाली नोट; ₹500, ₹200 और ₹100 के नोटों की भारी खेप बरामद।
  • नेपाल कनेक्शन: गिरफ्तार तस्कर सूर्यदेव कुमार जाली नोट लेकर नेपाल के ‘राजाक्षेत्री’ नाम के व्यक्ति को देने जा रहा था।
  • छापेमारी का सिलसिला: मधुबनी रेलवे स्टेशन से शुरू हुई जांच गया और बोधगया के किराये के मकान तक पहुंची, जहाँ चल रहा था ‘प्रिंटिंग’ का खेल।
  • गिरफ्तारी: नालंदा का सूर्यदेव और गया का उदल पासवान पुलिस की गिरफ्त में; जाली नोट छापने वाला प्रिंटर और कटर मशीन भी बरामद।

मधुबनी | 19 मार्च, 2026

​बिहार में जाली नोटों के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाले एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह का मधुबनी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन की शुरुआत 15 मार्च की रात मधुबनी रेलवे स्टेशन से हुई और इसके तार बोधगया के एक किराये के कमरे में चल रही ‘नकली नोटों की टकसाल’ से जा जुड़े। पुलिस ने न केवल नोट बरामद किए, बल्कि नोट छापने के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक प्रिंटर और पेपर कटर मशीन को भी जब्त कर लिया है।

स्टेशन के गेट नंबर-2 से खुला ‘काली कमाई’ का राज

​एसपी मधुबनी को मिली गुप्त सूचना के बाद सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में दो टीमों ने स्टेशन की घेराबंदी की थी:

  • तस्कर की चाल: रात करीब 10:30 बजे नालंदा निवासी सूर्यदेव कुमार पुलिस की चेकिंग देखकर भागने लगा, लेकिन टीम ने उसे दबोच लिया।
  • बैग में ‘खजाना’: जब सूर्यदेव के बैग की तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। उसमें ₹500, ₹200 और ₹100 के जाली नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं।

बोधगया में ‘नकली टकसाल’: प्रिंटर और स्केलर के साथ पकड़ा गया उदल

​सूर्यदेव की निशानदेही पर पुलिस की टीम गया जिले के बोधगया पहुंची। यहाँ विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के उदल पासवान के घर और फिर बोधगया के गौतम नगर स्थित एक किराये के कमरे में छापेमारी की गई:

  • फैक्ट्री का सेटअप: किराये के कमरे से जाली नोट छापने वाला कलर प्रिंटर, नोट कटर मशीन, ट्रांसपैरेंट टेप, रबर, स्केल और स्टेपलर बरामद किए गए।
  • सैंपल नोट: तस्करों ने असली नोटों को ‘सैंपल’ के तौर पर रखा था ताकि हुबहू वैसे ही जाली नोट छापे जा सकें।

बरामद सामग्री का ब्यौरा

​पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन में जो सामग्री बरामद की है, वह इस प्रकार है:

  1. कुल जाली मुद्रा: ₹6,44,000 (₹500 के 433 नोट, ₹200 के 1847 नोट और ₹100 के 295 नोट)।
  2. असली मुद्रा (सैंपल): ₹3,200 के असली नोट।
  3. मशीनरी: 01 कलर प्रिंटर, 03 नोट कटर मशीन।
  4. अन्य उपकरण: 100 पीस रबर, स्केल, कैंची और स्टेपलर।

VOB का नजरिया: क्या ‘सरहद पार’ से हो रही है आर्थिक आतंकी फंडिंग?

​मधुबनी पुलिस की यह कार्रवाई केवल दो अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जीत है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि नेपाल के ‘राजाक्षेत्री’ का नाम सामने आना यह बताता है कि यह केवल स्थानीय स्तर की ठगी नहीं है, बल्कि सीमा पार से जुड़ा एक गहरा नेटवर्क है।

​बोधगया जैसे पर्यटन स्थल पर किराये के कमरे में नोट छापना यह दर्शाता है कि अपराधी भीड़भाड़ वाले इलाकों को ढाल बना रहे हैं। पुलिस को अब उस ‘पेपर क्वालिटी’ और ‘स्याही’ के स्रोत का पता लगाना चाहिए, जो इन जाली नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। आम जनता के लिए भी यह चेतावनी है—रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले बाजारों में ₹200 और ₹500 के नोट लेते समय सावधानी बरतें।

  • Related Posts

    नालंदा में प्रशांत किशोर का हमला: “परिवारवाद से जनता परेशान, बिहार के युवा मजबूर होकर कर रहे मजदूरी”

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    पूर्व रेलवे का 70वां रेलवे सप्ताह समारोह: हावड़ा मंडल को समग्र दक्षता शील्ड, मालदा रहा उपविजेता

    Share Add as a preferred…

    Continue reading