HIGHLIGHTS: डगरूआ में ‘इंसानियत’ शर्मसार; 10 दिनों की तलाश का खौफनाक अंत
- साजिश का पर्दाफाश: 11 मार्च की रात ‘मेला’ दिखाने के बहाने घर से बुलाई गई युवती की बेरहमी से हत्या।
- मुख्य आरोपी गिरफ्त में: 20 वर्षीय सचिन गिरफ्तार; कबूला— “दुकान में किया दुष्कर्म, विरोध करने पर मार डाला।”
- सबूतों की बरामदगी: आरोपी की निशानदेही पर NH-31 स्थित नमस्कार होटल के पीछे खेत से शव बरामद।
- पुलिस पर सवाल: परिजनों का आरोप— “गुमशुदगी की शिकायत पर समय रहते एक्शन होता, तो बच सकती थी जान।”
- जनाक्रोश: NH-31 पर 5 घंटे तक चला ग्रामीणों का ‘हल्ला बोल’; प्रशासन के आश्वासन पर खुला जाम।
पूर्णिया (डगरूआ) | 21 मार्च, 2026
बिहार के पूर्णिया से एक ऐसी खबर आई है जो किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कंपा दे। 11 मार्च की उस काली रात से लापता चतरा गांव की 18 वर्षीय युवती का सफर ‘इंसाफ’ की मांग और ‘आंसुओं’ के बीच खत्म हुआ। जिस ‘मेले’ की चकाचौंध दिखाकर उसे घर से बाहर बुलाया गया था, वही उसकी जिंदगी की आखिरी शाम साबित हुई। पुलिस ने मुख्य आरोपी सचिन को दबोच लिया है, लेकिन इस घटना ने पूरे डगरूआ इलाके में दहशत और गुस्से की लहर पैदा कर दी है।
WhatsApp चैट और 4 महीने का ‘ट्रैप’
पुलिस की तकनीकी जांच (Technical Surveillance) इस केस में सबसे बड़ा हथियार साबित हुई:
- डिजिटल सबूत: युवती के मोबाइल और व्हाट्सऐप चैट्स से पता चला कि आरोपी सचिन पिछले 4 महीनों से उसके संपर्क में था।
- खौफनाक कबूलनामा: सचिन ने पुलिस को बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ युवती को मेला दिखाने ले गया था। वहां एक दुकान में उसके साथ दरिंदगी की गई। जब युवती ने विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, तो झड़प के दौरान उसकी हत्या कर दी गई।
- सबूत मिटाने की कोशिश: पहचान छिपाने और कानून से बचने के लिए आरोपियों ने शव को खेत में छिपा दिया था।
NH-31 पर ‘इंसाफ’ की जंग: “पुलिस सोती रही, बेटी मर गई”
जैसे ही युवती का शव बरामद हुआ, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
- घंटों रहा चक्का जाम: चतरा और रामपुर पंचायत के सैकड़ों लोगों ने NH-31 को जाम कर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने 11 मार्च के बाद ही पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन ‘सुस्ती’ ने दरिंदों को मौका दे दिया।
- FSL की जांच: घटनास्थल पर पहुँची FSL की टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, पूर्णिया भेजा गया है।
VOB का नजरिया: क्या ‘गुमशुदगी’ की फाइलों में दब जाती है बेटियों की चीख?
डगरूआ की यह घटना बिहार पुलिस के ‘रिस्पॉन्स टाइम’ पर एक बड़ा तमाचा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जब 11 मार्च को ही शिकायत दर्ज करा दी गई थी, तो पुलिस को मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स निकालने में इतना समय क्यों लगा? 10 दिनों तक एक बेटी दरिंदों के बीच रही या उसका शव खेत में पड़ा रहा, और पुलिस ‘प्रक्रिया’ का इंतजार करती रही।
सचिन की गिरफ्तारी तो सिर्फ एक शुरुआत है। इस ‘गैंगरेप’ में शामिल अन्य दरिंदे अब भी बाहर हैं। यह मामला ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में चलना चाहिए ताकि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि दोबारा कोई ‘मेले’ के बहाने किसी बेटी की अस्मत से खेलने की जुर्रत न करे। ‘डिजिटल फ्रेंडशिप’ के इस दौर में माता-पिता को भी सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन प्रशासन की जिम्मेदारी ‘अपराध होने के बाद लाश ढूंढने’ की नहीं, बल्कि ‘अपराध रोकने’ की होनी चाहिए।


