पूरक पोषाहार योजना में बड़ा कवरेज: जनवरी में 45 लाख से अधिक लाभुकों तक पहुंचा टीएचआर, फेस रिकग्निशन से पारदर्शिता बढ़ी

पटना | 4 अप्रैल बिहार में कुपोषण से लड़ाई को मजबूत करने के लिए संचालित पूरक पोषाहार योजना के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जनवरी माह के दौरान राज्य भर में 45 लाख से अधिक लाभार्थियों को टीएचआर उपलब्ध कराया गया, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिला है।

1.15 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए वितरण

समाज कल्याण विभाग के अधीन आईसीडीएस निदेशालय द्वारा राज्य के 1 लाख 15 हजार 64 आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह योजना लागू की जा रही है। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता में इजाफा

अब टीएचआर वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया गया है। फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के जरिए लाभुकों का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में कुल 54 लाख 3 हजार 766 लाभार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 53 लाख 82 हजार 471 का सत्यापन एफआरएस के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया।

वहीं, टीएचआर वितरण के तहत 45 लाख 56 हजार 22 लाभुकों को राशन उपलब्ध कराया गया, जो योजना की प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा लाभुक

जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी चंपारण इस सूची में सबसे आगे रहा, जहां 2 लाख 9 हजार 480 लाभुकों को टीएचआर दिया गया। इसके बाद कटिहार में 1 लाख 88 हजार 853, पूर्णिया में 1 लाख 58 हजार 194, पश्चिम चंपारण में 1 लाख 54 हजार 14 और गया में 1 लाख 53 हजार 230 लाभार्थियों को पोषाहार वितरित किया गया।

फर्जी लाभार्थियों पर लगाम, जरूरतमंदों तक पहुंच

आईसीडीएस निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि फेस रिकग्निशन सिस्टम लागू होने के बाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है। इससे न केवल फर्जी लाभुकों की पहचान संभव हो सकी है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना

राज्य सरकार की इस तकनीकी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है। पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से इस तरह की डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे देशभर में पोषण योजनाओं की निगरानी और बेहतर क्रियान्वयन संभव हो सके।

टीएचआर वितरण में बढ़ती संख्या और डिजिटल सत्यापन प्रणाली का सफल उपयोग यह दर्शाता है कि बिहार सरकार पोषण योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में इस तरह की पहल से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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