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BAU सबौर में 20 वीं प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक

ByAditya

Jun 12, 2021

दिनांक 11.06.2021 को प्रसार शिक्षा परिषद की 20 वीं बैठक बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर में डा . रविन्द्र कुमार सोहाने , माननीय कुलपति की अध्यक्षता एवं डा . ए . के . सिंह , उप महानिदेशक ( कृषि विस्तार ) , भा.कृ.अनु.परि . , नई दिल्ली बैठक के मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुई ।

इस बैठक में विशेषज्ञ के रूप में डा . अंजनी कुमार , निदेशक , अटारी , पटना , डा . आर . के . जाट , वरीय वैज्ञानिक , बीसा , समस्तीपुर , डा . आर . के . मलिक , वैज्ञानिक , सीजा , पटना , डा . एस . के . गुप्ता , निदेशक प्रसार शिक्षा , एस.के.यू. ए.एस.टी. , जम्मू , डा . ए . पी . राव , निदेशक प्रसार , आचार्य नरेन्द्र देव विश्वविद्यालय , अयोध्या सम्मिलित हुए एवं बहुमूल्य सुझाव दिये ।

कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान वर्चुअल मोड में उपस्थित थे । मुख्य अतिथि ने अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय अन्तर्गत किये जा रहे प्रसार कार्यो की सराहना की । राज्य में धान एवं गेहूँ की वर्तमान उत्पादकता को कुछ प्रमुख बिन्दुओं को चिन्हित कर उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष रूप से कार्य करने की जरूरत है । राज्य के बाढ़ग्रस्त जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों से आहवान किया कि बाढ़ से निपटने के लिए चिन्हित कृषि तकनीकों का प्रयोग कर किसानों की क्षति को कम किया जा सकता है । राज्य के देशी / लोकल प्रभेदों को प्रोत्साहित करने एवं राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान दिलाने हेतु जी . आई . टैग जैसे महत्वपूर्ण मानक दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने की जरूरत है ।

उन्होंने अपने सम्बोधन में आर्या जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को अन्य परियोजनाओं से वित्तीय रूप से जोड़ने , युवाओं के लिए उद्यमिता विकास मॉडल , एवं एफ.पी.ओ. बनाने आदि पर विशेष बल दिया । डा . रविन्द्र कुमार सोहाने , माननीय कुलपति , बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम हेतु पंचवर्षीय योजना के लिए 238 करोड़ रूपये की राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति दी गयी है जिसमें से इस वित्तीय वर्ष हेतु 71 करोड़ रूपये मिले है । पोस्ट हार्वेस्ट को बढ़ावा देने के लिए पी.एफ. एम.ई. से सपोर्ट मिला है जिससे सबएग्री परियोजना के तहत 15 स्टार्टअप प्रोगाम चलाया जा रहा है । कृषि तकनीकों को एस.डी. कार्ड , यूट्युब के माध्यम से किसानों के मध्य उपलब्ध कराया जा रहा है । हाल में ही बिहार लीची को भारत सरकार का जी . आई . टैग प्राप्त हहुआ है और विदेशों में निर्यात करने की तैयारी भी की जा रही है । डा . आर . एन . सिंह , सह निदेशक प्रसार शिक्षा ने कार्यक्रम के आरंभ में स्वागत भाषण देते हुए कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा किये जा रहे विभिन्न प्रसार कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । साथ ही उन्होने बताया कि कोविड -19 अवधि में आई.सी.टी. के तहत कम्युनिटी रेडियो की भूमिका अहम रही है एवं इस दौरान विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल की लोकप्रियता बढ़ी है जिसमें 360 विडियो कन्टेन्ट को , 3,48,000 लोगों ने सब्सक्राइब किया एवं 4 करोड़ लोगों के द्वारा देखा गया है । विश्वविद्यालय अन्तर्गत 02 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन ( मुख्यालय एवं पटना ) पहले से संचालित है और इस वर्ष 02 नये कम्युनिटी रेडियो स्टेशन गया एवं जिलों में स्थापित किये गये है । इस वित्तीय वर्ष में कुल 400 प्रशिक्षण कार्यक्रम कराये गये जिसमें 9,900 प्रतिभागियों ने भाग लिया । उन्होंने बताया कि प्रत्यक्षण कार्यक्रम के क्रियान्वयन से मसूर की सामान्य उपज में 1.5 गुणा से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गयी । राज्य में नवम्बर -2019 में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरूआत 08 जिलों में की गयी थी जिसके अच्छे परिणाम धरातल पर प्राप्त होने से बिहार सरकार द्वारा दिसम्बर , 2020 तक 30 जिलों में बढ़ाया गया जिसमें से 18 जिलें बी.ए.यू. , सबौर अन्तर्गत नियंत्रणाधीन है । केवीके , बाँका के डा , धर्मेन्द्र कुमार द्वारा सामुदायिक पशु स्वास्थ्य केन्द्र , प्रसार मॉडल प्रस्तुत किया गया जिसमें युवाओं एवं महिलाओं को पशुओं के प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देकर दक्ष किया गया एवं स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सक उपलब्ध कराया गया जिससे वे अपने गाँव में ही बीमार व जरूरतमंद पशुओं को उपचार आदि कर सके ।

 

इस मॉडल से युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है , साथ ही साथ पशुपालक में पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने की प्रवृति बढ़ रही है । केवीके रोहतास के डा . रतन कुमार ने पराली प्रबंधन पर मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया कि एक एकड़ में लगभग 1300 से 1600 पराली का संग्रह हुआ जिसमें एक पराली का वजन लगभग 21 से 25 किलो होता है एवं 1 किलो पराली का मूल्य 2 रूपये बताया तथा 1.5 रूपये लागत मूल्य एवं 50 पैसा प्रति किलोग्राम लाभ प्राप्त होता है । इस तकनीकी से किसान जहाँ पराली को जलाकर राख कर देते थे अब इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाने की ओर अग्रसर हो रहे है । इस तरह से हमारा वातावरण भी प्रदूषण मुक्त रहेगा । प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक में बी.ए.यू. सबौर के क्षेत्राधिकार में संचालित सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों ने अपनी वार्षिक उपलब्धि तथा वर्ष 2021-22 की कार्ययोजना प्रस्तुत किया । इस अवसर पर बाँका एवं रोहतास जिले के प्रगतिशील किसान , विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान एवं विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता , निदेशक , कुलसचिव , नियंत्रक , विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष , विभागाध्यक्ष , शिक्षक एवं वैज्ञानिकगण आदि वर्चुअल माध्यम से जुड़े । अन्त में , धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता डा . अभय मानकर , उप निदेशक प्रशिक्षण , बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के द्वारा की गयी ।