मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के सांसदों ने एक नया बिल प्रस्तावित किया है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क (टोल) लगाया जा सकता है। इस प्रस्ताव में शिपिंग, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति से जुड़े उन देशों और कंपनियों को शामिल किया गया है, जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं। इसे अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के संदर्भ में ईरान की व्यापक रणनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों—खासतौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तत्व—ने एक वैकल्पिक “सुरक्षित मार्ग” तैयार करना शुरू किया है। यह मार्ग उन जहाजों के लिए बताया जा रहा है, जो तेहरान की शर्तों को मानने को तैयार हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एक तेल टैंकर ऑपरेटर ने लारक द्वीप के पास सुरक्षित मार्ग से गुजरने के लिए लगभग 2 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। साथ ही, कई अन्य देश भी अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान से बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि, इस व्यवस्था की आलोचना भी हो रही है। आलोचकों का कहना है कि यह एक अनौपचारिक टोल प्रणाली की तरह काम कर रही है, जिसमें ईरान जहाजों की जांच कर चुनिंदा तौर पर ही उन्हें गुजरने की अनुमति देता है। वहीं, मुख्य जलडमरूमध्य क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों, मिसाइलों, ड्रोन और बारूदी सुरंगों के खतरे के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील और आंशिक रूप से अवरुद्ध बनी हुई है।
ईरान इस शुल्क को सुरक्षा उपाय के रूप में पेश कर रहा है। उसका तर्क है कि जहाजों को उस क्षेत्र में सुरक्षित संचालन बनाए रखने के लिए योगदान देना चाहिए, जहां लगातार सुरक्षा खतरे बने हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जो देश सीधे संघर्ष में शामिल नहीं हैं, उनके साथ “सुरक्षित मार्ग” को लेकर बातचीत की जा सकती है। हालांकि, इस पूरी व्यवस्था का कानूनी आधार अस्पष्ट बना हुआ है और यह किसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त ढांचे के तहत संचालित नहीं हो रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: किसका है नियंत्रण?
होर्मुज जलडमरूमध्य किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं आता। यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसका महत्व बेहद अधिक है।
भौगोलिक रूप से यह जलडमरूमध्य उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान के बीच स्थित है। दोनों देशों का अपने-अपने तटीय जलक्षेत्र पर अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरे जलमार्ग के मालिक हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जहाजों को बिना पूर्व अनुमति के यहां से गुजरने का अधिकार होता है, बशर्ते वे निर्धारित नौवहन नियमों का पालन करें।
क्या ईरान कानूनी रूप से टोल लगा सकता है?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुसार, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के ‘समुद्री कानून कन्वेंशन’ (UNCLOS) के तहत, ऐसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों पर “ट्रांजिट पैसेज” का सिद्धांत लागू होता है। इस सिद्धांत के तहत सभी देशों के जहाजों और विमानों को बिना किसी बाधा के आवागमन का अधिकार प्राप्त होता है।
इसका अर्थ यह है कि कोई भी तटीय देश—जिसमें ईरान भी शामिल है—सिर्फ गुजरने के लिए जहाजों पर एकतरफा शुल्क नहीं लगा सकता। हालांकि वे सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े नियम लागू कर सकते हैं, लेकिन वे इस मार्ग को बंद नहीं कर सकते और न ही इसे निजी नियंत्रण में ले सकते हैं।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम केंद्र है। ऐसे में ईरान द्वारा प्रस्तावित ट्रांजिट शुल्क और “सुरक्षित मार्ग” जैसी व्यवस्थाएं न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर बहस और चिंता का विषय बन गई हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर कूटनीतिक और कानूनी टकराव और बढ़ सकता है।


