
पूर्वी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को और मजबूत तथा तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने को लेकर सिक्किम की राजधानी गंगटोक में पूर्वी क्षेत्रीय विद्युत समिति (ERPC) की 56वीं तकनीकी समन्वय समिति (TCC) की अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बिहार समेत पूर्वी भारत के कई राज्यों के विद्युत उपक्रमों और ऊर्जा संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में ग्रिड प्रबंधन, ऊर्जा समन्वय, नवीकरणीय ऊर्जा, डेटा प्रबंधन और ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में बिहार द्वारा प्रस्तुत विभिन्न तकनीकी एजेंडों की विशेष रूप से सराहना की गई। खासकर ग्रिड फ्रीक्वेंसी प्रबंधन, डेटा कलेक्शन और ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़े सुझावों को क्षेत्रीय विद्युत समूह ने सकारात्मक और उपयोगी बताया। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार द्वारा उठाए गए ये मुद्दे आने वाले समय में पूरे पूर्वी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को और अधिक स्थिर और प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं।
गंगटोक में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम सहित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को बेहतर समन्वय के साथ संचालित करना और भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीति तैयार करना था।
ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को देखते हुए तकनीकी समन्वय अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के अतिरिक्त एजेंडे में ग्रिड फ्रीक्वेंसी मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण, स्काडा सिस्टम का अपग्रेडेशन, कैप्टिव पावर डेटा संग्रहण और भारत-भूटान के बीच रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग जैसे कई अहम विषय शामिल किए गए। इन मुद्दों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया और विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा किए गए।
बैठक में यह बात सामने आई कि भविष्य में बिजली की मांग और उत्पादन के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने के लिए ग्रिड प्रबंधन को और मजबूत करना जरूरी होगा। खासकर सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली प्रणाली में तकनीकी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन मौसम पर निर्भर होता है, इसलिए ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्नत तकनीकी व्यवस्था और रियल टाइम मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। इसी दिशा में स्काडा अपग्रेडेशन और ऑटोमैटिक ग्रिड कंट्रोल सिस्टम को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
बैठक में राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे अंडर फ्रीक्वेंसी रिले (UFR) और ऑटोमैटिक जनरेशन कंट्रोल (AGC) व्यवस्था को और सुदृढ़ करें ताकि बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार की अस्थिरता न आए। अधिकारियों ने कहा कि यदि ग्रिड प्रबंधन मजबूत रहेगा तो बड़े स्तर पर बिजली कटौती और तकनीकी बाधाओं से बचा जा सकेगा।
कैप्टिव पावर डेटा कलेक्शन को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि कई उद्योग अपने निजी बिजली संयंत्रों का उपयोग करते हैं, लेकिन उनके डेटा का समुचित रिकॉर्ड नहीं होने के कारण बिजली प्रबंधन में कठिनाई आती है। इसी वजह से राज्यों को कैप्टिव पावर पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान बिहार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण मुद्दा डीवीसी की 400 केवी एसटीयू ट्रांसमिशन लाइनों को आईएसटीएस पावर वहन करने वाली नॉन-आईएसटीएस लाइन के रूप में प्रमाणित करने से जुड़ा था। इस तकनीकी प्रस्ताव को क्षेत्रीय स्तर पर सराहा गया और इसे बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था के लिए उपयोगी बताया गया।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के तकनीकी समन्वय से राज्यों के बीच बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन में बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकता है। इससे बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और ट्रांसमिशन नेटवर्क अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
बैठक में लंबित बिजली परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि कई परियोजनाओं में देरी होने के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। इसलिए सभी राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करें और तय समयसीमा में कार्य पूरा करें।
इसके अलावा बिजली क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) के विभिन्न नियमों पर भी चर्चा हुई। हितधारकों के साथ प्रस्तावित संवाद सत्र के लिए सुझाव आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया ताकि भविष्य में नीतियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
बैठक में BSPTCL के निदेशक (संचालन) अवधेश कुमार सिंह, ERPC के सदस्य सचिव के. बी. जगताप, PGCIL के कार्यपालक निदेशक ए. के. नाइक, OHPC के निदेशक (संचालन) अमिया कुमार मोहंती, TVNL के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार शर्मा, JUSNL के निदेशक (संचालन) आशीष कुमार, JBVNL के निदेशक पी. के. श्रीवास्तव, DVC के कार्यपालक निदेशक संजीव श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले समय में पूर्वी क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्यों के बीच बेहतर तकनीकी समन्वय बेहद जरूरी होगा। तेजी से बढ़ती बिजली खपत, औद्योगिक विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ग्रिड प्रबंधन और डेटा सिस्टम को आधुनिक बनाना समय की मांग बन चुकी है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस तरह की क्षेत्रीय बैठकें बिजली व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। विभिन्न राज्यों के बीच अनुभव साझा होने से नई तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने में मदद मिलती है।
फिलहाल गंगटोक में आयोजित ERPC की यह बैठक पूर्वी भारत के बिजली क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर बिहार द्वारा प्रस्तुत तकनीकी एजेंडों को मिली सराहना ने यह संकेत दिया है कि राज्य अब ऊर्जा प्रबंधन और ग्रिड संचालन के क्षेत्र में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


