Kolkata, 11नवंबर 2025:
मालदा डिविजनल रेलवे अस्पताल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा “यूरिन स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस” विषय पर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। यह एक आम लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या है, जिसके बारे में रेलवे लाभार्थियों को जानकारी देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सेमिनार 10.11.2025 को अस्पताल के कॉन्फ्रेंस रूम में हुआ।
डॉ. सुरेश चंद्र मंडल ने दी विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम में मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र मंडल ने अपने छात्रों के साथ विस्तृत सत्र लिया।
उन्होंने इस समस्या के:
- लक्षण
- कारण
- जोखिम कारक
- निदान
- और उपचार विकल्पों
पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. मंडल ने बताया कि यह समस्या विशेषकर महिलाओं में जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और अक्सर शर्म या संकोच के कारण रिपोर्ट नहीं की जाती।
बचाव, पहचान और इलाज पर जोर
डॉ. मंडल ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए:
- सही जीवनशैली
- शुरुआती पहचान
- और जोखिम कारकों (जैसे डायबिटीज़, धूम्रपान, शराब सेवन, बार-बार गर्भधारण)
का पता लगाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने गैर-शल्य चिकित्सा (नॉन-सर्जिकल) और शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) दोनों प्रकार के उपचारों की जानकारी दी।
इसके साथ ही उन्होंने PRP (Platelet Rich Plasma) थेरेपी के बारे में बताया, जो बिना सर्जरी के ऊतकों को ठीक करने और सुधार लाने में मदद करती है।
क्या है यूरिन स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस?
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस वह स्थिति है जिसमें खांसने, छींकने, हंसने या व्यायाम करने जैसी गतिविधियों के दौरान अनियंत्रित रूप से पेशाब निकल जाता है।
यह तब होता है जब:
- पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं,
- या मूत्रमार्ग को नियंत्रित करने वाली स्फिंक्टर मांसपेशी ढीली हो जाती है।
आम कारणों में गर्भधारण, प्रसव, मोटापा, बढ़ती उम्र और प्रोस्टेट सर्जरी शामिल हैं।
कर्मचारियों और मरीजों की सक्रिय भागीदारी
सेमिनार में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और विभिन्न विभागों की महिला कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम रेलवे कर्मचारियों—पुरुष और महिला दोनों—साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ और मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ।


