दानापुर स्टेशन पर रेल संपत्ति के ‘दुश्मन’ ढेर: पाटलिपुत्र-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के शौचालय से नल उखाड़ रहे दो चोर दबोचे गए

खगौल/पटना। भारतीय रेल को देश की जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व इसी जीवनरेखा की सुविधाओं को अपना निशाना बनाने से बाज नहीं आते। दानापुर रेलवे स्टेशन पर एक बार फिर रेल संपत्ति की सुरक्षा में तैनात आरपीएफ की मुस्तैदी रंग लाई है। गुरुवार को प्लेटफॉर्म संख्या छह पर खड़ी पाटलिपुत्र-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के भीतर उस समय हड़कंप मच गया, जब रेल सुरक्षा बल (RPF) ने दो युवकों को ट्रेन के शौचालय से स्टील के कीमती नल चोरी करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह घटना केवल एक छोटी सी चोरी नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता पर प्रहार है जो सार्वजनिक सुविधाओं को अपनी निजी जागीर समझकर नुकसान पहुँचाती है। पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान रोशन कुमार और गोविंद कुमार के रूप में हुई है।

​प्लेटफॉर्म संख्या 6 पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: शौचालय में चल रहा था उखाड़-पछाड़ का खेल

​दानापुर स्टेशन का प्लेटफॉर्म संख्या छह आमतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए उपयोग किया जाता है। गुरुवार को यहाँ पाटलिपुत्र-चंडीगढ़ एक्सप्रेस खड़ी थी। ट्रेन के रवाना होने में अभी कुछ समय बाकी था, तभी गश्ती पर तैनात आरपीएफ और सीआईबी (CIB) की संयुक्त टीम को कोच के भीतर कुछ संदिग्ध हलचल महसूस हुई। जब सुरक्षाकर्मियों ने ट्रेन के भीतर जाकर जांच की, तो शौचालय के पास से खटपट की आवाजें आ रही थीं।

​सुरक्षा बल ने जब शौचालय का दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का नजारा हैरान करने वाला था। रोशन और गोविंद नामक दो युवक बड़ी चालाकी से स्टील के नलों को उखाड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने पहले ही कुछ नल खोलकर अपने पास रख लिए थे। आरपीएफ की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल रेल संपत्ति की रक्षा की, बल्कि उन यात्रियों को भी होने वाली भारी असुविधा से बचा लिया जो अगले कई घंटों तक इस ट्रेन में सफर करने वाले थे। बिना नल के शौचालय का उपयोग करना किसी भी यात्री के लिए नरक जैसा अनुभव हो सकता है, और ये चोर इसी मानवीय सुविधा पर डाका डाल रहे थे।

​रेल संपत्ति की तस्करी का काला बाजार: क्यों निशाना बनते हैं स्टील के नल?

​अक्सर मन में यह सवाल आता है कि आखिर चोर ट्रेन के नलों या पंखों के पीछे क्यों पड़े रहते हैं? दरअसल, रेलवे अब अपनी आधुनिक ट्रेनों में उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील (SS) के नलों का उपयोग करता है। बाजार में इन नलों की अच्छी कीमत मिल जाती है। स्थानीय कबाड़ी या छोटे वेल्डर इन्हें कम दाम में खरीद लेते हैं और आगे इन्हें गलाकर या पॉलिश कर बेच दिया जाता है।

​रोशन और गोविंद जैसे अपराधी अक्सर इसी ‘ईजी मनी’ (आसान पैसे) के लालच में ट्रेनों को निशाना बनाते हैं। ये चोर जानते हैं कि ट्रेन के शौचालय में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं होता, जिसका फायदा उठाकर वे आसानी से टूल्स की मदद से नलों को उखाड़ लेते हैं। दानापुर में हुई इस गिरफ्तारी ने एक ऐसे गिरोह की ओर इशारा किया है जो छोटे-छोटे पुर्जों की चोरी कर रेलवे को सालाना करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा है।

​रोशन और गोविंद: अपराध की पटरी पर भटके युवा

​गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रोशन कुमार और गोविंद कुमार के रूप में हुई है। पुलिस अब इनके पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि ये दोनों आदतन अपराधी हो सकते हैं, जो अक्सर स्टेशनों पर लावारिस खड़ी ट्रेनों या प्लेटफॉर्म पर लगी गाड़ियों को अपना निशाना बनाते हैं। आरपीएफ पोस्ट दानापुर में इन दोनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो काम नहीं कर रहा है।

​अक्सर ऐसे मामलों में देखा गया है कि इन चोरों को स्टेशन के आसपास सक्रिय कुछ ‘रिसीवर’ (चोरी का माल खरीदने वाले) का संरक्षण प्राप्त होता है। निरीक्षक प्रभारी रेसुब पोस्ट और सीआईबी दानापुर के नेतृत्व में यह सफल ऑपरेशन चलाया गया। आरोपियों के पास से चोरी किए गए स्टील के नलों को जब्त कर लिया गया है, जो अब अदालत में सबूत के तौर पर पेश किए जाएंगे।

​यात्री सुविधाओं पर प्रहार: रेलवे के रखरखाव विभाग की बढ़ती चुनौतियां

​जब भी कोई ट्रेन वाशिंग पिट से निकलकर प्लेटफॉर्म पर आती है, तो उसे पूरी तरह सुसज्जित और कार्यशील बनाया जाता है। लेकिन जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी होती है, चोरों का गिरोह सक्रिय हो जाता है। एक नल की चोरी केवल कुछ सौ रुपये का नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम को बाधित करती है।

  • पानी की बर्बादी: नल चोरी होने के बाद यदि पानी की सप्लाई चालू रहती है, तो पूरे कोच में पानी भर जाता है, जिससे यात्रियों का सामान खराब होता है और कोच की फर्श को नुकसान पहुँचता है।
  • रखरखाव का बोझ: एक बार नल चोरी होने पर रेलवे के मैकेनिकल विभाग को उसे दोबारा लगाने के लिए पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है, जिससे श्रम और समय की बर्बादी होती है।
  • यात्री असंतोष: पाटलिपुत्र से चंडीगढ़ तक का सफर लंबा है। अगर रास्ते में किसी यात्री को पता चले कि शौचालय में नल ही नहीं है, तो उसका गुस्सा रेलवे प्रशासन पर फूटता है, जबकि असली कसूरवार ये चोर होते हैं।

​आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त रणनीति: अपराध मुक्त दानापुर का संकल्प

​दानापुर रेल मंडल में सुरक्षा व्यवस्था को अब ‘इंटेलिजेंस बेस्ड’ बनाया जा रहा है। सीआईबी दानापुर की टीम सादे लिबास में प्लेटफॉर्मों पर तैनात रहती है, ताकि संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। रोशन और गोविंद की गिरफ्तारी इसी रणनीति का परिणाम है। निरीक्षक प्रभारी ने बताया कि स्टेशनों पर गश्त बढ़ाई गई है और विशेष रूप से रात के समय या उन ट्रेनों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है जो प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय तक खड़ी रहती हैं।

​रेलवे सुरक्षा बल ने स्पष्ट किया है कि रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत इन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें न केवल जेल की सजा का प्रावधान है, बल्कि भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कानून का यह शिकंजा अन्य चोरों के लिए भी एक चेतावनी है जो रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दुस्साहस करते हैं।

​निष्कर्ष: नागरिक जिम्मेदारी और सतर्कता

​दानापुर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि रेलवे की सुरक्षा केवल आरपीएफ का काम नहीं है। एक सजग यात्री के रूप में हमारी भी यह जिम्मेदारी है कि अगर हमें ट्रेन के भीतर कोई संदिग्ध व्यक्ति कुछ उखाड़ते या छिपाते हुए दिखे, तो तुरंत रेल मदद हेल्पलाइन (139) या पास के सुरक्षाकर्मी को सूचित करें। रोशन और गोविंद जैसे चोरों का अंत सलाखों के पीछे ही होना चाहिए ताकि आम जनता का सफर सुरक्षित और सुविधापूर्ण बना रहे।

​फिलहाल, दोनों आरोपियों को दानापुर रेसुब पोस्ट में कानूनी प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना पड़ रहा है। उनके पास से बरामद रेल संपत्ति इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अपराध की उम्र बहुत छोटी होती है। दानापुर पुलिस की इस मुस्तैदी ने यह साफ कर दिया है कि पटरियों पर अब चोरों की खैर नहीं है।

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