HIGHLIGHTS
- बड़ी कार्रवाई: मोतिहारी के चकिया में एसटीएफ (STF) और अपराधियों के बीच भीषण मुठभेड़।
- भारी नुकसान: बिहार एसटीएफ के जवान श्रीराम यादव ने ऑपरेशन के दौरान दिया सर्वोच्च बलिदान।
- अपराधी ढेर: कुख्यात कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मौके पर ही मारे गए।
- दुस्साहस: अपराधियों ने नेपाल के नंबर से अपर थानाध्यक्ष को दी थी पुलिसकर्मियों की हत्या की धमकी।
मोतिहारी | 17 मार्च, 2026
बिहार के मोतिहारी जिले से रूह कंपा देने वाली लेकिन पुलिस के शौर्य की बड़ी खबर सामने आई है। चकिया थाना क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई ‘आर-पार’ की जंग में दो शातिर अपराधियों का अंत हो गया है। हालांकि, इस वीरतापूर्ण अभियान में बिहार पुलिस ने अपना एक जांबाज सिपाही खो दिया है। एसटीएफ के जवान श्रीराम यादव अपराधियों की गोलियों का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
नेपाल से दी थी चुनौती: “देख लो हमारी गुंडई”
यह मुठभेड़ कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस का परिणाम थी:
- धमकी: अपराधियों ने नेपाल के एक मोबाइल नंबर से चकिया के अपर थानाध्यक्ष को फोन किया था।
- चैलेंज: फोन पर अपराधियों ने सीधे तौर पर पुलिस को चुनौती देते हुए कहा था कि वे 15 पुलिसकर्मियों की हत्या करेंगे और पुलिस उनकी ‘गुंडई’ देखेगी। इस इनपुट के बाद एसटीएफ और स्थानीय पुलिस अलर्ट मोड पर थी।
आधी रात को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और मुठभेड़
बीती रात जब संयुक्त टीम अपराधियों के ठिकाने पर छापेमारी करने पहुंची, तो अपराधियों ने सरेंडर करने के बजाय अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
- बलिदान: मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ जवान श्रीराम यादव को दो गोलियां लगीं। उन्हें तुरंत मोतिहारी के रहमानिया मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
- जवाबी प्रहार: पुलिस की ओर से हुई जवाबी फायरिंग में कुख्यात कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ढेर हो गए। इन दोनों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और पुलिस को काफी समय से इनकी तलाश थी।
शोक में डूबा महकमा
घटना की सूचना मिलते ही डीआईजी और एसपी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद जवान श्रीराम यादव के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। देर रात अस्पताल पहुंचे परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया।
VOB का नजरिया: शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, लेकिन कीमत बहुत बड़ी है!
मोतिहारी का यह एनकाउंटर बिहार पुलिस के ‘इकबाल’ को फिर से स्थापित करता है। जब अपराधी पुलिस को ही मारने की धमकी देने लगें, तो जवाब ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन एक जांबाज जवान की शहादत दिल को कचोटती है। अपराधियों का नेपाल के नंबरों का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि सीमा पार से उनकी सांठ-गांठ कितनी गहरी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ शहीद श्रीराम यादव को नमन करता है। अब जरूरत है इन अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की ताकि भविष्य में कोई दूसरा ‘कुंदन’ पुलिस को चुनौती देने की हिम्मत न कर सके।


