पटना, 19 जुलाई।“महिला सहभागिता से विकसित बिहार की परिकल्पना” विषयक एक सम्मेलन में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बिहार में महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव ने राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर किया है। सम्मेलन का आयोजन भारतीय लोक प्रशासन संस्थान और जीविका के संयुक्त तत्वावधान में सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में हुआ।
सम्मेलन में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी संबोधन दिया।
महिला सशक्तिकरण से मिला विकास को बल
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई महिला सशक्तिकरण की नीति आज पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, छात्राओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना, और शराबबंदी जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए, जो समाज में महिलाओं को मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में आज 11 लाख स्वयं सहायता समूहों के जरिए 1.40 करोड़ से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी हैं।
महिलाओं की सफलता देश के लिए प्रेरणा : डॉ. जितेंद्र सिंह
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिहार में महिला सशक्तिकरण एक सफल कहानी के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजनाओं — उज्ज्वला, मुद्रा, और महिला उत्थान कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार की तीन करोड़ से अधिक महिलाएं आज लखपति दीदी के रूप में खड़ी हैं।
2047 तक महिलाओं को सशक्त करना अनिवार्य : गिरिराज सिंह
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो महिलाओं का सशक्त होना जरूरी है। उन्होंने बिहार सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ अब महिलाएं बन रही हैं।
जीविका दीदियों को मिल रहा नया अवसर : श्रवण कुमार
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका समूहों की महिलाएं अब अस्पताल, प्रखंड कार्यालयों, आवासीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न सेवाओं का संचालन करेंगी।
- राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों और परिजनों को सस्ते दर पर भोजन
- जिला अस्पतालों और प्रखंड कार्यालयों में कैंटीन का संचालन
- आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की पोशाक की सिलाई
- आवासीय विद्यालयों की रसोई का संचालन
इसके लिए जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे इन कार्यों को कुशलता से कर सकें।


