अन्नदाताओं का सशक्तिकरण: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने रचा नया कीर्तिमान

नई दिल्ली, अगस्त 2025 —भारत के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने देश में कृषि सुरक्षा का नया अध्याय लिख दिया है। 18 फरवरी 2016 को शुरू हुई यह योजना अब तक 78.41 करोड़ किसान आवेदनों का बीमा कर चुकी है और 1.83 लाख करोड़ रुपये के दावे किसानों को प्रदान किए जा चुके हैं।

केरल के किसान श्री लाल कृष्णेश इसकी मिसाल हैं। 2022 में भारी बारिश से उनकी पूरी फसल नष्ट हो गई थी। पीएमएफबीवाई में किए गए 20,000 रुपये के निवेश ने उन्हें प्रीमियम का 9 गुना भुगतान दिलाया। 2023 में एक और आपदा आई, लेकिन इस बार भी उन्हें 6.6 गुना मुआवजा मिला। वे कहते हैं, “यह योजना केवल बीमा नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में सहारा है।”


योजना की प्रमुख विशेषताएं

  • एक राष्ट्र, एक फसल, एक प्रीमियम सिद्धांत — देशभर में समान प्रीमियम दरें।
  • किफायती प्रीमियम दरें — खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी के लिए 1.5%, वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5%।
  • व्यापक कवरेज — सूखा, बाढ़, चक्रवात, कीट, बीमारियाँ, स्थानीय आपदाएँ और कटाई के बाद का नुकसान।
  • समय पर मुआवजा — लक्ष्य: फसल कटाई के 2 माह के भीतर दावा निपटान।
  • तकनीकी नवाचार — उपग्रह इमेजरी, ड्रोन, मोबाइल ऐप और मौसम निगरानी प्रणाली।

रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धियां (2024-25)

  • पंजीकृत किसानों की संख्या 3.17 करोड़ (2022-23) से बढ़कर 4.19 करोड़32% वृद्धि
  • गैर-ऋणधारक किसानों के आवेदन 20 लाख (2014-15) से बढ़कर 522 लाख
  • अब तक 22.667 करोड़ किसानों को मुआवजा भुगतान।
  • पीएमएफबीवाई अब दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना

सरकार के सुधारात्मक कदम

  • राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) — डिजिटल नामांकन, दावे का ट्रैकिंग और सीधे बैंक खाते में भुगतान।
  • डिजिक्लेम मॉड्यूल — दावे में देरी पर 12% स्वत: ब्याज।
  • एस्क्रो अकाउंट सिस्टम — राज्यों द्वारा अग्रिम प्रीमियम जमा अनिवार्य।
  • YES-TECH — रिमोट सेंसिंग आधारित फसल उपज अनुमान प्रणाली।
  • WINDS नेटवर्क — स्वचालित मौसम स्टेशन व वर्षा मापक यंत्रों का देशव्यापी विस्तार।

भविष्य की दिशा

PMFBY अब किसानों को सिर्फ आपदा से उबारने तक सीमित नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती, बेहतर बीज और तकनीक अपनाने और आर्थिक स्थिरता की ओर भी अग्रसर कर रही है।

जैसा कि श्री कृष्णेश कहते हैं, “यह योजना हमें सिर्फ खेतों में नहीं, बल्कि जिंदगी में भी खड़ा करती है।”


 

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