बिहार के गरीबों की छत पर अब ‘मुफ्त’ चमकेगी बिजली! PM सूर्य घर योजना में बड़ा बदलाव—स्मार्टफोन नहीं तो भी मिलेगा लाभ; जानें कैसे करें अप्लाई

HIGHLIGHTS:

  • बड़ी राहत: कुटीर ज्योति (BPL) उपभोक्ताओं के लिए अब ‘ऑफलाइन’ आवेदन का भी विकल्प।
  • सोलर क्रांति: 2.5 लाख घरों की छतों पर लगेंगे 1.1 किलोवाट के सोलर पैनल; बिजली बिल होगा ‘जीरो’।
  • डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक जमा करना होगा सहमति पत्र; स्थानीय दफ्तरों में लगेंगे विशेष शिविर।
  • फ्री बिजली: छायारहित छत होने पर सरकार निशुल्क लगाएगी पैनल; ग्रिड से जुड़कर पैदा होगी 275 मेगावाट बिजली।

बिना ‘स्मार्टफोन’ भी घर आएगी सौर ऊर्जा: सरकार ने दूर किया बड़ा ‘झंझट’

पटना: बिहार के ग्रामीण और गरीब इलाकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना को लेकर सरकार ने अपनी प्रक्रिया में बड़ा मानवीय बदलाव किया है। अब तक इस योजना के लिए ‘सुविधा ऐप’ (Suvidha App) से सहमति देना अनिवार्य था, जिससे उन बीपीएल उपभोक्ताओं को दिक्कत हो रही थी जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। लेकिन अब, आप अपने पास के बिजली कार्यालय या विभाग द्वारा लगाए जा रहे शिविरों में जाकर हाथ से फॉर्म भरकर अपनी सहमति दे सकते हैं।

[योजना का ‘पावर चार्ट’: क्या मिलेगा आपको?]

​सरकार का लक्ष्य केवल बिजली देना नहीं, बल्कि गरीबों को ‘बिजली उत्पादक’ बनाना है।

मुख्य बिंदु

जानकारी

पात्रता

कुटीर ज्योति (BPL) उपभोक्ता

क्षमता (Capacity)

1.1 किलोवाट (kW) रूफटॉप सोलर

कुल लक्ष्य (Phase-1)

लगभग 2.5 लाख घर

आवेदन की अंतिम तिथि

31 मार्च 2026

कुल बिजली उत्पादन

275 मेगावाट (MW)

पैनल लगवाने की ‘शर्त’ और प्रक्रिया: ऐसे मिलेगा लाभ

​योजना का लाभ लेने के लिए केवल आवेदन ही काफी नहीं है, कुछ तकनीकी मानकों को भी पूरा करना होगा:

    1. सहमति पत्र (Consent): सबसे पहले सुविधा ऐप या स्थानीय शिविर में जाकर अनुमति फॉर्म भरें।
    2. स्थल निरीक्षण (Site Survey): सहमति मिलने के बाद बिजली विभाग की टीम आपके घर आएगी।
    3. छायारहित छत (Shadow-free Roof): अगर आपकी छत पर पर्याप्त धूप आती है और वहां छाया नहीं रहती, तभी पैनल लगाए जाएंगे।
    4. निशुल्क स्थापना: पात्र उपभोक्ताओं के लिए यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल निशुल्क होगी।

महत्वपूर्ण नोट: ये सभी सोलर पैनल ‘ग्रिड’ से जुड़े होंगे। इसका मतलब है कि दिन में सूरज से बनी बिजली आप इस्तेमाल करेंगे और अतिरिक्त बिजली सीधे ग्रिड में चली जाएगी, जिससे आपके बिल का बोझ पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

शिविरों का रुख करें उपभोक्ता: समय कम है!

​ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च की समय सीमा के बाद आवेदनों पर विचार करना मुश्किल होगा। इसलिए, जो उपभोक्ता डिजिटल माध्यम से अपनी बात नहीं रख पा रहे थे, उनके लिए अब ‘ग्राउंड’ पर जाकर अधिकारी मदद करेंगे। ग्रामीण इलाकों में इसके लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।

VOB का नजरिया: ‘डिजिटल इंडिया’ में जमीनी हकीकत का ख्याल!

सरकार का यह कदम सराहनीय है कि उसने स्मार्टफोन की अनिवार्यता को शिथिल किया। बिहार में आज भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो ‘डिजिटल गैप’ के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाता था। 2.5 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि उन परिवारों की आर्थिक स्थिति भी सुधारेगा जिनका एक बड़ा हिस्सा बिजली बिल में चला जाता है। बस अब चुनौती यह है कि 31 मार्च तक विभाग कितने ‘सटीक’ सर्वे कर पाता है।

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