
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही राजनीतिक दलों की हलचल तेज हो गई है। इस बार चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा हथियार हेलीकॉप्टर यानी उड़न खटोला बन गया है। नेताओं को कम समय में ज्यादा जनसभाएं करने और राज्य के कोने-कोने तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है।
2020 का रिकॉर्ड और हेलीकॉप्टर की अहमियत
- साल 2020 के चुनाव में हेलीकॉप्टरों का जबरदस्त इस्तेमाल हुआ था।
- उस समय तेजस्वी यादव ने रोजाना 14 से 16 जनसभाएं की थीं।
- एक दिन तो उन्होंने 19 जनसभाओं का रिकॉर्ड बनाया था, जो हेलीकॉप्टर से ही संभव हो पाया।
- अब यह रणनीति और भी बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है।
इस बार कितने हेलीकॉप्टर उड़ेंगे?
- पटना एयरपोर्ट के स्टेट हैंगर के अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान रोजाना 20 हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे।
- एनडीए की ओर से 14 से 15 हेलीकॉप्टर इस्तेमाल होंगे।
- इसमें से अकेले बीजेपी ने 12-13 हेलीकॉप्टर बुक किए हैं।
- जेडीयू (JDU) के पास रोजाना 2 हेलीकॉप्टर रहेंगे।
- छोटे घटक दलों को भी इसमें जगह दी जाएगी।
- महागठबंधन ने कुल 5 हेलीकॉप्टर बुक किए हैं।
- कांग्रेस और आरजेडी (RJD) ने 2-2 हेलीकॉप्टर बुक किए।
- वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी हेलीकॉप्टर से प्रचार करेंगे।
किराया और खर्चा कितना?
- आम दिनों में सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर का किराया 1-2 लाख रुपये प्रति घंटा होता है।
- चुनाव के दौरान यह बढ़कर 3-4 लाख रुपये प्रति घंटा तक पहुंच जाता है।
- दलों को कम से कम 3 घंटे का फ्लाइंग चार्ज देना पड़ता है।
- साथ ही 18% जीएसटी भी चुकाना होता है।
- इस तरह, एक हेलीकॉप्टर का रोजाना औसत खर्च 11 लाख रुपये तक बैठता है।
क्यों जरूरी है हेलीकॉप्टर?
- बिहार का भौगोलिक विस्तार बहुत बड़ा है – उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक।
- सड़क मार्ग से कम समय में इतनी जनसभाएं करना लगभग असंभव है।
- हेलीकॉप्टर नेताओं को एक दिन में 10 से 15 जनसभाएं करने का मौका देता है।
- दूरदराज ग्रामीण इलाकों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
हाईटेक प्रचार और आसमान में जंग
- इस बार का चुनाव प्रचार पूरी तरह हाईटेक और तेज रफ्तार वाला होगा।
- सोशल मीडिया पर आक्रामक कैंपेन चल रहे हैं।
- वहीं, जमीनी स्तर पर हेलीकॉप्टर प्रचार का सबसे बड़ा साधन बन चुका है।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार इतना पैसा आसमान में खर्च होगा, जितना पहले कभी नहीं हुआ।
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी लड़ा जाएगा।
नेताओं की रैलियों में भीड़ जुटाने और हर कोने तक पहुंचने की होड़ अब हेलीकॉप्टरों के जरिए होगी। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गुट अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ तैयार हैं। निश्चित तौर पर इस चुनाव में हेलीकॉप्टरों की गूंज बिहार की राजनीति की तस्वीर बदल देगी।


