शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: भोजपुर में 507 स्कूलों पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, ₹2.5 करोड़ के उपयोग का हिसाब लंबित

आरा (भोजपुर): बिहार के भोजपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूलों में वित्तीय अनियमितता को लेकर शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। स्कूलों के मरम्मत और रंग-रोगन के लिए जारी किए गए करीब ₹2.5 करोड़ की राशि का अब तक उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं किया गया है। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने 507 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को अंतिम चेतावनी जारी की है।

20 मार्च तक का अल्टीमेटम, वरना सख्त कार्रवाई
जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार राय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी संबंधित स्कूल 20 मार्च तक हर हाल में खर्च का पूरा विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को सौंपें। समयसीमा के भीतर रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले प्राचार्यों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसमें वेतन पर रोक लगाने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी शामिल है।

दो वर्षों से लंबित है हिसाब
बताया जा रहा है कि यह राशि पिछले दो वर्षों में स्कूलों के रखरखाव, मरम्मत और रंग-रोगन के लिए दी गई थी। लेकिन बड़ी संख्या में स्कूलों ने अब तक यह नहीं बताया कि पैसा कहां और कैसे खर्च किया गया। विभाग को आशंका है कि इस मामले में वित्तीय गड़बड़ी हो सकती है।

बड़हरा और आरा प्रखंड में सबसे ज्यादा अनियमितता
जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन बड़हरा और आरा प्रखंड सबसे आगे हैं।

  • बड़हरा के 93 स्कूलों ने करीब ₹46.50 लाख का हिसाब नहीं दिया है।
  • आरा के 81 स्कूलों पर लगभग ₹40.50 लाख बकाया है।
    इसके अलावा शाहपुर, शहर क्षेत्र और अन्य प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में स्कूलों ने उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है।

प्रमुख प्रखंडों की स्थिति एक नजर में:

  • बड़हरा: 93 स्कूल – सबसे अधिक लापरवाही
  • आरा: 81 स्कूल – भारी बकाया
  • शाहपुर: 55 स्कूल – गंभीर स्थिति
  • शहर (भोजपुर): 54 स्कूल – लापरवाही जारी
  • तरारी: 3 स्कूल – न्यूनतम बकाया

वेतन बंदी से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की तैयारी
DEO ने साफ कर दिया है कि निर्धारित तिथि तक जवाब नहीं देने वाले प्रधानाध्यापकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा। साथ ही उनके खिलाफ ‘प्रपत्र क’ के तहत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी, जो आगे चलकर कानूनी प्रक्रिया का रूप ले सकती है।

जवाबदेही तय करने में जुटा विभाग
शिक्षा विभाग अब इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और संभावित गड़बड़ी की जांच में जुट गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह कार्रवाई न सिर्फ संबंधित स्कूलों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।

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