नई दिल्ली/पटना। (ईडी) ने गुरुवार को बिहार समेत छह राज्यों में एक साथ छापेमारी कर फर्जी नौकरी दिलाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर के करीब 40 सरकारी विभागों और संगठनों के नाम पर अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम की ठगी कर रहा था।
ईडी के अनुसार, शातिरों ने अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र दिए और कई मामलों में नौकरी को असली दिखाने के लिए दो से तीन महीने का शुरुआती वेतन भी दिया गया। इससे पीड़ितों को लंबे समय तक धोखे में रखा गया और ठगी की रकम वसूली जाती रही।
छह राज्यों में 15 ठिकानों पर छापे
ईडी ने गुरुवार को कुल 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। बिहार में और ; उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, प्रयागराज (इलाहाबाद) और लखनऊ; पश्चिम बंगाल में कोलकाता; तमिलनाडु में चेन्नई; गुजरात में राजकोट और केरल के चार शहरों में एक साथ कार्रवाई की गई।
छापेमारी के दौरान ई-मेल ट्रेल, फर्जी लेटरहेड, बैंक खातों से जुड़े कागजात और फर्जी नियुक्ति पत्र सहित कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं।
बिहार में कहां-कहां हुई कार्रवाई
बिहार में ईडी की टीम ने मुजफ्फरपुर के रामबाग चौड़ी और मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के कोटवा और डुमरियाघाट इलाके में छापेमारी की। रामबाग चौड़ी स्थित जयप्रकाश पथ में नंदकिशोर गुप्ता के मकान में किराए पर रह रहे कामेश्वर पांडेय के घर की तलाशी ली गई। हालांकि, ईडी की कार्रवाई की भनक लगते ही कामेश्वर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि कामेश्वर, इस कांड के मुख्य आरोपी राजेंद्र तिवारी का रिश्तेदार है।
पूर्वी चंपारण के अमवा गांव में सक्षम श्रीवास्तव और सेमुआपुर में दीपक तिवारी के घरों पर भी करीब 15 घंटे तक तलाशी ली गई। दोनों जगहों पर दस्तावेज खंगाले गए और परिजनों से पूछताछ के बाद ईडी की टीम लौट गई।
पहले भी सामने आ चुका है मामला
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में आरपीएफ ने दीपक तिवारी और सक्षम श्रीवास्तव को सोनपुर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद छापेमारी में पूर्वी चंपारण के भटहा गांव में आरपीएफ का फर्जी ट्रेनिंग सेंटर भी सामने आया था, जिसने इस पूरे रैकेट की गंभीरता को उजागर किया था।
ईडी का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मनी ट्रेल की गहन जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


