
कोलकाता। ट्रेन में सफर के दौरान एक छोटी-सी लापरवाही न केवल आपकी यात्रा खराब कर सकती है, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान को भी खतरे में डाल सकती है। इसी संदेश को लेकर पूर्व रेलवे ने धूम्रपान के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। रेलवे ने यात्रियों को चेतावनी दी है कि ट्रेन, रेलवे स्टेशन या रेलवे परिसर में धूम्रपान करना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ 2,000 रुपये तक का जुर्माना, ट्रेन से उतारने और यात्रा टिकट या पास जब्त करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
पूर्व रेलवे ने यात्रियों को जागरूक करने के लिए एक काल्पनिक लेकिन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित उदाहरण भी साझा किया। रेलवे के अनुसार, कई बार यात्री यह सोचकर ट्रेन के शौचालय में सिगरेट पी लेते हैं कि रात का समय है और कोई उन्हें देख नहीं पाएगा। लेकिन अब आधुनिक तकनीक से लैस ट्रेनों में लगे स्मोक डिटेक्टर कुछ ही सेकंड में धुएं का पता लगा लेते हैं। जैसे ही धुआं सेंसर तक पहुंचता है, फायर अलार्म सक्रिय हो जाता है और रेलवे सुरक्षा बल तथा टिकट जांच कर्मचारी तुरंत संबंधित कोच तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में एक क्षण की लापरवाही पूरी यात्रा को मुश्किल में बदल सकती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों में धूम्रपान केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर मामला है। ट्रेन एक बंद वातावरण होता है, जहां धुएं और आग के फैलने का खतरा सामान्य स्थानों की तुलना में कहीं अधिक होता है। यदि सिगरेट की चिंगारी किसी ज्वलनशील वस्तु के संपर्क में आ जाए तो कुछ ही मिनटों में बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ऐसी स्थिति में यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान भी संभव है।
रेलवे ने बताया कि अतीत में देश और दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां छोटी-सी लापरवाही ने भीषण आग का रूप ले लिया। इसी वजह से भारतीय रेल लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बना रही है और धूम्रपान के मामलों में ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाई गई है।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में पूरे जोन में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेनों के कोच और शौचालयों में अत्याधुनिक स्वचालित स्मोक डिटेक्टर लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण धुएं की मामूली मात्रा का भी तुरंत पता लगा लेते हैं और अलार्म सक्रिय कर देते हैं। इससे संभावित आगजनी की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।
रेलवे स्टेशनों और परिसरों में भी निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ की गई है। प्रमुख स्टेशनों पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इसके अलावा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की नियमित गश्त भी बढ़ाई गई है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही कारण है कि धूम्रपान करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यदि कोई व्यक्ति ट्रेन, स्टेशन या रेलवे परिसर में धूम्रपान करते हुए पकड़ा जाता है तो रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 167 के तहत उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कानून के तहत दोषी व्यक्ति पर 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा उसे ट्रेन से तत्काल उतारा जा सकता है तथा उसका टिकट या यात्रा पास भी जब्त किया जा सकता है। गंभीर परिस्थितियों में अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक दंड का मामला नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
रेलवे का कहना है कि एक व्यक्ति की लापरवाही पूरे कोच के यात्रियों को संकट में डाल सकती है। ट्रेन में यात्रा कर रहे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य यात्रियों की सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए प्रत्येक यात्री को नियमों का पालन करना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में ट्रेन या रेलवे परिसर में धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि रेल यात्रा आपसी विश्वास और साझा जिम्मेदारी पर आधारित होती है। जब कोई यात्री ट्रेन के भीतर सिगरेट जलाता है, तो वह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि अपने साथ यात्रा कर रहे अन्य लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल देता है। उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक आधुनिक और सतर्क हो चुकी है तथा नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अधिकतम जुर्माना और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत आदतों से ऊपर उठकर सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें। रेलवे को सुरक्षित और धूम्रपान मुक्त बनाए रखना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रत्येक यात्री की भी जिम्मेदारी है। यदि सभी यात्री नियमों का पालन करेंगे तो यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक और सुखद बन सकेगी।
रेलवे ने यात्रियों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि किसी ट्रेन, स्टेशन या रेलवे परिसर में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत रेलवे कर्मचारियों, टिकट जांच दल या रेलवे सुरक्षा बल को दें। समय पर दी गई सूचना किसी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है और यात्रियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पूर्व रेलवे ने दोहराया कि आने वाले समय में भी धूम्रपान विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा। आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी निगरानी, स्मोक डिटेक्टर, आरपीएफ की सक्रिय तैनाती और नियमित जांच के माध्यम से रेलवे नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि यात्रियों में जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करना है। इसलिए सभी यात्रियों से अपील की गई है कि वे हमेशा नियमों का पालन करें, धूम्रपान से बचें और भारतीय रेल को सुरक्षित, स्वच्छ तथा दुर्घटनामुक्त बनाए रखने में अपना सहयोग दें।


