
कोलकाता से लेकर छोटे शहरों तक, रेलवे स्टेशन लंबे समय से यात्रियों के लिए सिर्फ यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि कई बार एक चुनौती भी रहे हैं। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और भारी सामान के साथ सफर करने वाले लोगों के लिए स्टेशन पर मौजूद ऊंचे फुटओवर ब्रिज और लंबी-लंबी सीढ़ियां किसी बड़ी बाधा से कम नहीं थीं। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। पूर्व रेलवे ने अपने स्टेशनों को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने के लिए जो पहल शुरू की है, उसने हजारों यात्रियों की यात्रा को आसान और सम्मानजनक बना दिया है।
बदलती तस्वीर: अब सीढ़ियां नहीं, सुविधाएं हैं प्राथमिकता
कुछ समय पहले तक रेलवे स्टेशन पर पहुंचना कई लोगों के लिए मानसिक और शारीरिक तनाव का कारण बन जाता था। बुजुर्ग यात्रियों को जहां घुटनों के दर्द के साथ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं, वहीं दिव्यांग यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म तक पहुंचना दूसरों पर निर्भर रहने जैसा अनुभव था।
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब वही यात्री बिना किसी परेशानी के आधुनिक लिफ्ट और एस्केलेटर की मदद से आसानी से प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहे हैं। इससे न केवल उनकी यात्रा आसान हुई है, बल्कि उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
93 लिफ्ट और 77 एस्केलेटर: बड़ा बदलाव
पूर्व रेलवे ने 31 मार्च 2026 तक अपने विभिन्न स्टेशनों पर कुल 93 लिफ्ट स्थापित कर दी हैं। यह एक बड़ा कदम है, जो रेलवे के यात्रियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इन लिफ्टों का वितरण अलग-अलग मंडलों में इस प्रकार किया गया है:
- आसनसोल मंडल: 23 लिफ्ट
- हावड़ा मंडल: 19 लिफ्ट
- मालदा मंडल: 37 लिफ्ट
- सियालदह मंडल: 14 लिफ्ट
इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए 77 एस्केलेटर भी चालू किए जा चुके हैं। इनका वितरण इस प्रकार है:
- आसनसोल: 9 एस्केलेटर
- हावड़ा: 26 एस्केलेटर
- मालदा: 16 एस्केलेटर
- सियालदह: 26 एस्केलेटर
यह आंकड़े बताते हैं कि रेलवे अब सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि एक आधुनिक और यात्री-केंद्रित सेवा बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए बड़ा सहारा
इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा उन यात्रियों को हुआ है, जो पहले स्टेशन पर आने से भी कतराते थे। अब बुजुर्ग लोग बिना किसी डर के ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंच रहे हैं। वहीं दिव्यांग यात्रियों को अब दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
रेलवे की यह पहल ‘सुगम भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती देती है, जहां हर नागरिक को समान सुविधा और अवसर मिले।
2026-27 के लिए नई योजना
पूर्व रेलवे ने सिर्फ मौजूदा सुविधाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि भविष्य के लिए भी स्पष्ट योजना बनाई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 14 नई लिफ्ट लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
इन प्रस्तावित लिफ्टों का वितरण इस प्रकार होगा:
- आसनसोल मंडल: 5 नई लिफ्ट
- मालदा मंडल: 6 नई लिफ्ट
- सियालदह मंडल: 3 नई लिफ्ट
इसके अलावा, आसनसोल मंडल में 4 नए एस्केलेटर भी लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों की आवाजाही और भी सुगम हो सके।
भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर विशेष ध्यान
रेलवे प्रशासन ने उन स्टेशनों को प्राथमिकता दी है, जहां यात्रियों की संख्या अधिक है और भीड़भाड़ की स्थिति बनी रहती है। ऐसे स्थानों पर लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि प्लेटफॉर्म पर भीड़ प्रबंधन भी बेहतर होगा।
यह रणनीति दिखाती है कि रेलवे केवल सुविधाएं बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि स्मार्ट प्लानिंग और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दे रहा है।
यात्रियों के अनुभव में आया बड़ा बदलाव
नई सुविधाओं के कारण यात्रियों के अनुभव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब स्टेशन पर पहुंचते ही यात्रियों को एक आधुनिक, व्यवस्थित और सुविधाजनक माहौल मिलता है।
लिफ्ट और एस्केलेटर ने यात्रा को न केवल आसान बनाया है, बल्कि समय की बचत भी सुनिश्चित की है। खासकर उन यात्रियों के लिए, जिनके पास सीमित समय होता है, यह सुविधाएं बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।
रेलवे का उद्देश्य: हर यात्री के लिए समान सुविधा
पूर्व रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को सभी वर्गों के यात्रियों के लिए समान रूप से सुलभ बनाना है।
रेलवे का मानना है कि यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि एक अनुभव है, और इस अनुभव को बेहतर बनाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
भविष्य की दिशा: और आधुनिक होगा रेलवे
आने वाले समय में पूर्व रेलवे अपने स्टेशनों को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें डिजिटल सुविधाएं, बेहतर संकेतक, साफ-सफाई और यात्री सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
लिफ्ट और एस्केलेटर की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि रेलवे अब यात्रियों की जरूरतों को समझते हुए तेजी से बदलाव कर रहा है।
पूर्व रेलवे की यह पहल सिर्फ एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर भी संकेत करती है। अब रेलवे स्टेशन किसी के लिए डर या परेशानी का कारण नहीं, बल्कि सुविधा और सम्मान का प्रतीक बनते जा रहे हैं।
लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाओं के विस्तार से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में भारतीय रेलवे पूरी तरह से यात्री-केंद्रित और आधुनिक स्वरूप में नजर आएगा, जहां हर यात्री—चाहे उसकी उम्र, क्षमता या परिस्थिति कुछ भी हो—आसानी से यात्रा कर सकेगा।


