सीतामढ़ी | 10 मार्च, 2026: बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस की कार्यशैली और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के एक थानाध्यक्ष (SHO) पर सहरसा की रहने वाली एक छात्रा ने शादी का झांसा देकर पिछले सात वर्षों तक शारीरिक शोषण करने का संगीन आरोप लगाया है। यह मामला तब गरमाया जब आरोपी पुलिस अधिकारी और पीड़िता से जुड़ी कुछ तस्वीरें और ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
सहरसा से सीतामढ़ी तक ‘धोखे’ की दास्तान
पीड़िता, जो मूल रूप से सहरसा की रहने वाली है, का दावा है कि उसकी पहचान उक्त थानाध्यक्ष से सात साल पहले हुई थी।
- शादी का झांसा: छात्रा का आरोप है कि अधिकारी ने उसे शादी का भरोसा दिलाया और लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा।
- 7 साल का लंबा सफर: पीड़िता के अनुसार, वह वर्षों तक इस उम्मीद में चुप रही कि अधिकारी अपनी बात निभाएगा, लेकिन अब उसे केवल धोखा मिला है।
डिजिटल सबूत: वायरल ऑडियो-वीडियो ने बढ़ाई हलचल
हालांकि इस मामले में अब तक पुलिस को कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन ‘इंटरनेट की अदालत’ में सुनवाई शुरू हो चुकी है।
- वायरल क्लिप्स: सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें और ऑडियो क्लिप तैर रहे हैं जिनमें कथित तौर पर थानाध्यक्ष और छात्रा के बीच के निजी संवाद होने का दावा किया जा रहा है।
- पुष्टि का इंतजार: ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इन वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप्स की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन इनकी वजह से पुलिस विभाग की छवि पर गहरा असर पड़ा है।
प्रशासनिक रुख: आवेदन का इंतज़ार या ‘अंदरूनी’ जांच?
सीतामढ़ी पुलिस इस मामले में फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जब तक पीड़िता की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती, तब तक एफआईआर (FIR) की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। हालांकि, सूत्रों का यह भी मानना है कि मामला एक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण विभाग आंतरिक रूप से इसकी जानकारी जुटा रहा है।
मामले का वर्तमान स्टेटस:
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विवरण |
वर्तमान स्थिति |
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आरोप |
शादी का झांसा देकर 7 साल तक यौन शोषण |
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आरोपी |
जिले का एक वर्तमान थानाध्यक्ष |
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लिखित शिकायत |
अभी तक दर्ज नहीं |
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सोशल मीडिया |
ऑडियो और फोटो वायरल |
VOB का नजरिया: जब रक्षक ही बन जाए ‘भक्षक’!
अगर छात्रा के आरोपों में सच्चाई है, तो यह सीतामढ़ी पुलिस के लिए शर्मसार करने वाली बात है। एक थानाध्यक्ष, जिस पर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, अगर खुद ही ऐसे घिनौने कृत्यों में संलिप्त पाया जाता है, तो जनता का कानून से भरोसा उठना लाजिमी है। केवल ‘लिखित आवेदन’ का इंतजार करना प्रशासन की ढिलाई भी हो सकती है; वायरल सबूतों के आधार पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर जांच शुरू की जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


