बिहार के मोकामा से बाहुबली और चर्चित विधायक अनंत कुमार सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में बड़ा कानूनी झटका लगा है।
सिविल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद अब वे इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर हलचल तेज हो गई है।
चुनावी प्रचार के दौरान हुई गिरफ्तारी — बेऊर जेल में हैं बंद
अनंत सिंह को 30 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार के दौरान ही दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
उन पर आरोप है कि चुनावी टकराव के दौरान यह हत्या हुई, जिसमें उनका नाम प्रमुख संदिग्धों में शामिल है।
गिरफ्तारी के बाद से अनंत सिंह पटना के बेऊर जेल में बंद हैं।
अब सिविल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी कानूनी लड़ाई और लंबी हो गई है।
कौन थे दुलारचंद यादव?
दुलारचंद यादव इलाके के स्थानीय व्यापारी थे और चुनावी समय में सक्रिय सामाजिक संपर्क रखते थे।
हत्या के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है और इसे चुनावी हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है।
JDU के टिकट से जीते थे चुनाव — RJD की वीणा देवी को दिया था मात
अनंत सिंह ने इस बार जनता दल यूनाइटेड (JDU) के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीता।
उन्होंने मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया था।
अनंत सिंह पहले से ही मोकामा में अपनी मजबूत पकड़ और जनाधार के लिए जाने जाते हैं।
चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने पटना स्थित अपनी पत्नी के आवास पर भव्य जश्न कार्यक्रम भी आयोजित किया था, जिसमें हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी।
अक्सर विवादों में रहे हैं अनंत सिंह
अनंत सिंह पर पहले भी कई गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
वे कई आपराधिक मामलों में आरोपी और कई में अभियुक्त रह चुके हैं।
इसके बावजूद उनके इलाके में जनाधार कम नहीं हुआ, और वे कई बार चुनाव जीतते आए हैं।
अब क्या होगा? — हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका
सिविल कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अनंत सिंह की कानूनी टीम अब पटना हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केस की रिपोर्ट, चार्जशीट और बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक हलचल भी तेज
एक ओर जहां उनके समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे कानून व्यवस्था और चुनावी हिंसा से जोड़कर निशाना साध रहा है।
JDU की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।


