
श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर भागलपुर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय लगातार जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रही हैं। इसी क्रम में सुल्तानगंज में निरीक्षण के दौरान उनका सख्त प्रशासनिक रवैया देखने को मिला, जब अजगैबीनाथ मंदिर के समीप श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई। हाईमास्ट लाइट की असुरक्षित स्थिति को देखकर जिलाधिकारी ने मौके पर ही बिजली विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
श्रावण माह बिहार और झारखंड सहित पूरे पूर्वी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर माना जाता है। सुल्तानगंज का उत्तरवाहिनी गंगा घाट इस दौरान आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है, जहां से लाखों कांवरिया गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा शुरू करते हैं। ऐसे में यहां की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था सीधे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ जाती है। प्रशासन इस बार किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारियों में जुटा है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई सुरक्षा चूक
जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय अधिकारियों की टीम के साथ श्रावणी मेले की तैयारियों का जायजा लेने सुल्तानगंज पहुंची थीं। निरीक्षण के दौरान उनका ध्यान अजगैबीनाथ मंदिर के पास लगाए गए हाईमास्ट लाइट पर गया। जांच में पाया गया कि हाईमास्ट लाइट श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बनाई गई रेलिंग से बेहद करीब स्थित है।
यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानी गई, क्योंकि भारी भीड़ के दौरान श्रद्धालुओं का रेलिंग से सटकर गुजरना आम बात है। यदि बिजली से जुड़ा कोई तकनीकी दोष सामने आता या संरचना असुरक्षित रहती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। यही संभावना देखकर जिलाधिकारी ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।
बिजली विभाग के अधिकारी को लगाई कड़ी फटकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने बिजली विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी को मौके पर ही फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल स्थापना करने वाला विभाग जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि हाईमास्ट लाइट भले नगर परिषद द्वारा लगाई गई हो, लेकिन बिजली से जुड़े हर संभावित खतरे की जानकारी और तकनीकी समझ बिजली विभाग के पास होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यदि यह संरचना श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनती है, तो समय रहते सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए। निरीक्षण के दौरान उनका रुख बेहद स्पष्ट और सख्त दिखा।
तुरंत सुरक्षा कवर लगाने का निर्देश
जिलाधिकारी ने मौके पर ही आदेश दिया कि हाईमास्ट लाइट के निचले हिस्से को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा सुरक्षा कवच लगाया जाए जिससे कोई श्रद्धालु सीधे संरचना के संपर्क में न आ सके।
साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया कि कार्य जल्द पूरा कर इसकी रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ निर्देश देना पर्याप्त नहीं है; तय समयसीमा में काम पूरा होना चाहिए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सुरक्षा संबंधी सभी बिंदुओं पर विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।
“घूमने से काम नहीं चलेगा” — डीएम का स्पष्ट संदेश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि केवल औपचारिक दौरे और कागजी समीक्षा से काम नहीं चलेगा। जमीनी स्तर पर वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान करना ही प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विद्युत आपूर्ति और बिजली से जुड़े जोखिमों की जानकारी विभाग के पास सबसे अधिक होती है। इसलिए विभाग को सक्रिय और संवेदनशील रहना होगा। छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यह संदेश केवल बिजली विभाग के लिए नहीं, बल्कि मेले की तैयारियों में जुटे सभी विभागों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
श्रावणी मेला: आस्था के साथ बड़ी प्रशासनिक चुनौती
श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बड़ी चुनौती माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं। यहां से गंगाजल लेकर कांवरिया लगभग 100 किलोमीटर से अधिक की यात्रा तय कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं।
इतनी विशाल भीड़ के प्रबंधन के लिए प्रशासन को सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य, बिजली, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है। एक छोटी चूक भी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
विशेषकर मंदिर परिसर, घाट क्षेत्र, मुख्य मार्ग और अस्थायी शिविरों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है।
सुरक्षा और सुविधाओं पर प्रशासन का फोकस
इस वर्ष प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रहा है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, मेडिकल कैंप, कंट्रोल रूम और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की योजना बनाई गई है। इसके अलावा विद्युत तारों, अस्थायी संरचनाओं और हाईमास्ट लाइट जैसी सुविधाओं की तकनीकी जांच भी लगातार की जा रही है।
जिलाधिकारी के निरीक्षण से स्पष्ट संकेत मिला है कि इस बार सुरक्षा मानकों को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन का संदेश साफ
डीएम अलंकृता पांडेय के निरीक्षण और सख्त रुख ने प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी विभाग की लापरवाही सीधे जवाबदेही तय करेगी।
श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए प्रशासन हर स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुटा है। आने वाले दिनों में श्रावणी मेले की तैयारियां और तेज होने की उम्मीद है। यदि इसी तरह हर छोटी व्यवस्था पर बारीकी से नजर रखी गई, तो इस वर्ष मेला अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बन सकता है।


