देशभर में आज (20 अक्टूबर) को दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, बीते दिन 19 अक्टूबर को छोटी दिवाली मनाई गई थी, और अब अमावस्या तिथि पर दीपोत्सव की चमक हर ओर दिखाई दे रही है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, जिनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर पूरी अयोध्या को रोशनी से भर दिया था।
इसके अलावा, समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य भी इसी तिथि पर हुआ था, इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष विधान है।
दिवाली पूजा के लाभ
मान्यता है कि दिवाली पर विधि-विधान से पूजा और दीपक जलाने से घर में सुख, समृद्धि, वैभव और सौभाग्य का वास होता है।
दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:46 से रात 8:18 बजे तक
- वृषभ लग्न: शाम 7:08 से रात 9:03 बजे तक
- महानिशीथ काल: रात 11:41 से सुबह 12:31 बजे तक
- सिंह लग्न: रात 1:38 से सुबह 3:56 बजे तक
इनमें से किसी भी शुभ काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा की जा सकती है।
दिवाली पूजा विधि
- प्रातः स्नान करके नए वस्त्र धारण करें।
- सूर्य देव को जल अर्पित करें और घर की सफाई करें।
- पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
- शुभ मुहूर्त में तिलक लगाकर पूजन आरंभ करें।
- फूल, मिठाई, खील-बताशा और दीपक अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
- घर के हर कोने में दीपक जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक मनाएं।
पूजा सामग्री सूची
लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा, गंगाजल, फूल, माला, शंख, थाली, चांदी का सिक्का, खील-बताशा, रोली, अक्षत, सुपारी, लौंग, अगरबत्ती, धूप, दीपक, हल्दी की गांठ, दूर्वा घास और प्रसाद के लिए मिठाई।
दिवाली के मंत्र
- गणेश जी: ॐ गं गणपतये नमः
- लक्ष्मी जी: ॐ महालक्ष्म्यै नमः
- राम जी: ॐ श्री रामचन्द्राय नमः
लक्ष्मी-गणेश आरती
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
लक्ष्मी जी की आरती
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
महालक्ष्मीजी की आरती जो कोई जन गाता,
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता॥
दिवाली का संदेश
दीपावली का यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है।आइए इस अवसर पर हम सब मिलकर प्रकाश, सद्भावना और समृद्धि का दीप अपने जीवन में जलाएं।
सब बोलो — लक्ष्मी माता की जय, गणेश जी की जय।


