भागलपुर के समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में जीआई टैग प्राप्त भागलपुर के उत्पादों को बढ़ावा देने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कतरनी चावल, जर्दालू आम, भागलपुर के तसर सिल्क और मंजूषा पेंटिंग से जुड़े पदाधिकारी, किसान, बुनकर, व्यापारी और मंजूषा कलाकार शामिल हुए।
किसानों, बुनकरों और कलाकारों से हुआ विचार-विमर्श
बैठक के दौरान इन सभी जीआई टैग्ड उत्पादों के उत्पादन, संरक्षण, विपणन और पहचान को और मजबूत करने को लेकर किसानों, बुनकरों और कलाकारों से विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान उत्पादकों ने अपनी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं प्रशासन के समक्ष रखीं, जिन पर गंभीरता से चर्चा की गई।
चार जीआई टैग भागलपुर के लिए बड़ी उपलब्धि
बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भागलपुर जिले के लिए यह बेहद गर्व का विषय है कि यहां के चार पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है। कतरनी चावल, जर्दालू आम, मंजूषा पेंटिंग और सिल्क को मिली यह पहचान भागलपुर की सांस्कृतिक और कृषि विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का अवसर है।
उत्पादन, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग पर होगा फोकस
जिलाधिकारी ने बताया कि बैठक में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि इन उत्पादों का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, उनकी गुणवत्ता कैसे सुधारी जाए और पैकेजिंग व प्रोसेसिंग को आधुनिक कैसे बनाया जाए, ताकि सीधे तौर पर उत्पादकों को बेहतर मूल्य और लाभ मिल सके।
जिला और राज्य स्तर पर समाधान की रणनीति
उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान सामने आए बिंदुओं को नोट किया गया है। जिन समस्याओं और विषयों का समाधान जिला स्तर से संभव है, उन्हें जिला स्तर पर ही सुलझाया जाएगा। वहीं जिन मुद्दों के लिए राज्य स्तर की आवश्यकता होगी, उनके प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे और लगातार फॉलोअप किया जाएगा।
कतरनी चावल और सिल्क पर विशेष ध्यान
जिलाधिकारी ने बताया कि फिलहाल दो उत्पादों पर विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है, जिसमें कतरनी चावल और सिल्क शामिल हैं। इन दोनों उत्पादों के प्रमोशन और निर्यात की दिशा में ठोस पहल की जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में इस दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
गुणवत्ता सुधार से लेकर बाजार तक की योजना
उन्होंने कहा कि सबसे पहले इन उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। इसके बाद पैकेजिंग और प्रोसेसिंग को बेहतर बनाया जाएगा और फिर बाजार से इन्हें जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकें।
‘मेड इन भागलपुर’ से बनेगी नई पहचान
जिलाधिकारी ने कहा कि इन सभी जीआई टैग्ड उत्पादों की ब्रांडिंग ‘मेड इन भागलपुर’ के नाम से की जाएगी। इससे न केवल उत्पादों को एक अलग पहचान मिलेगी, बल्कि भागलपुर जिले की पहचान भी देश और दुनिया में और मजबूत होगी।


