बिहार के पश्चिम चंपारण निवासी राजा यादव, जिन्हें लोग ‘बिहारी टारजन’ के नाम से जानते हैं, अपनी जबरदस्त फिटनेस और स्टंट के लिए पहले से ही चर्चित हैं। अब इसी कड़ी में बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड स्थित केनरचक गांव के 18 वर्षीय दिलबर खान भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। अपनी असाधारण ताकत, कठिन ट्रेनिंग और खतरनाक स्टंट की वजह से दिलबर को लोग अब ‘बिहार का दूसरा टारजन’ कहने लगे हैं।
कौन हैं दिलबर खान?
दिलबर खान गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के केनरचक गांव के निवासी हैं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने ऐसी फिटनेस और स्टंट के जरिए पहचान बना ली है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। जहां राजा यादव रोज 20 से 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं, वहीं दिलबर खान हर दिन करीब 10 किलोमीटर दौड़ करते हैं और कड़ी मेहनत से खुद को तैयार कर रहे हैं।
हैरान कर देने वाले स्टंट
दिलबर खान के स्टंट और ताकत के कारनामे किसी प्रोफेशनल एथलीट से कम नहीं हैं।
- पीठ पर भारी टायर रखकर 10 पुशअप
- बिना टायर के 100 पुशअप
- सिर से लोहे की छड़ मोड़ देना
- 30 फीट ऊंचे बिजली के पोल पर चढ़कर स्टंट
- सिर को जमीन में गाड़ देना
- हाथ से स्कॉर्पियो कार खींचना
- रस्सी के सहारे पेड़ पर चढ़ना
उनकी रफ्तार इतनी तेज होती है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। दिलबर खुद मानते हैं कि लोग उन्हें अब ‘बिहारी टारजन’ कहने लगे हैं।
ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने का सपना
दिलबर खान का सपना है कि वे ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करें और फाइटिंग में गोल्ड मेडल जीतें। उनका कहना है कि वे 12 साल की उम्र से ही इस तरह की ट्रेनिंग और स्टंट करने लगे थे। तभी से गांव के लोग कहते थे कि यह लड़का आगे चलकर कुछ बड़ा करेगा।
कठिन डाइट और अनुशासन
दिलबर अपनी फिटनेस को लेकर बेहद अनुशासित हैं। वे रोजाना
- 5 लीटर दूध
- 1 किलो दाल
- करीब 50 रोटियां
- दर्जनभर केले
- ड्राई फ्रूट्स
का सेवन करते हैं, ताकि शरीर मजबूत बना रहे और ट्रेनिंग में कोई कमी न आए।
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं टूटा हौसला
दिलबर खान ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, लेकिन इसके बावजूद परिवार उनकी खुराक और ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आने दे रहा। उनके पिता कलीम खान राजमिस्त्री का काम करके और थोड़ी बहुत खेती कर बेटे की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
पिता को बेटे पर गर्व
दिलबर के पिता कलीम खान कहते हैं कि शुरू में उन्हें भी बेटे के स्टंट देखकर हैरानी होती थी, लेकिन आज उन्हें अपने बेटे के हौसलों पर गर्व है। उनका कहना है कि गरीबी के बावजूद वे और मेहनत करेंगे, ताकि दिलबर की प्रैक्टिस न रुके और वह देश के लिए कुछ कर सके।
गांव से लेकर जिले तक चर्चा
दिलबर खान की वजह से आज केनरचक गांव और गया जिला चर्चा में है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अगर उन्हें सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिला, तो वह एक दिन देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन कर सकते हैं।


