डिजिटल अरेस्ट कर 1.20 करोड़ लूटने वाला मास्टरमाइंड दबोचा: भागलपुर पुलिस की मधुबनी में दबिश; दुबई तक फैला है अवैध फाइनेंशियल नेटवर्क

भागलपुर/मधुबनी | साइबर अपराधियों ने अब ठगी का अंतरराष्ट्रीय जाल बिछा लिया है। भागलपुर के एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.20 करोड़ रुपए की बड़ी ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी मो. गुफरान, हरियाणा के फरीदाबाद में बैठकर एक संगठित अवैध फाइनेंशियल नेटवर्क चला रहा था, जिसके तार दुबई समेत कई विदेशी शहरों से जुड़े हैं।

मधुबनी के बिस्फी में छिपा था आरोपी

​वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशानुसार साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत भागलपुर साइबर थाना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली। तकनीकी अनुसंधान (Technical Surveillance) के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि कांड संख्या 92/25 का मुख्य आरोपी मो. गुफरान मधुबनी जिले के बिस्फी थाना अंतर्गत ग्राम छिछुआडिह में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने छापेमारी कर उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

फरीदाबाद से ऑपरेट होता था ‘ग्लोबल सिंडिकेट’

​पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी गुफरान फरीदाबाद को अपना ठिकाना बनाकर एक ऐसा अवैध फाइनेंशियल नेटवर्क चला रहा था, जो साइबर ठगी के पैसों को पलक झपकते ही विदेश ट्रांसफर कर देता था।

  • दुबई कनेक्शन: आरोपी का नेटवर्क दुबई और अन्य खाड़ी देशों में फैला हुआ है।
  • मनी लॉन्ड्रिंग: पीड़ित से ठगे गए 1.20 करोड़ रुपए को भी इसी नेटवर्क के जरिए विदेशों में भेजा गया है।
  • संगठित गिरोह: यह गिरोह पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से काम करता है, जिसमें ट्रांजेक्शन के लिए अलग-अलग लेयर्स का इस्तेमाल किया जाता है।

छापेमारी टीम में ये रहे शामिल

​SSP और सिटी SP के मार्गदर्शन में गठित इस विशेष टीम का नेतृत्व साइबर थाना प्रभारी सह पुलिस उपाधीक्षक श्री कनिष्क कर रहे थे। टीम में पु.अ.नि. शिव कुमार सुमन, रामकृष्ण, सिपाही अशोक कुमार, दीपक कुमार और चालक सिपाही रवि कुमार शामिल थे। तकनीकी सहयोग सिपाही धर्मेंद्र कुमार और नीतीश कुमार ने प्रदान किया। पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनसे कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

सावधान! क्या है डिजिटल अरेस्ट?

साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल आया है या वे किसी केस में फंसे हैं। इसके बाद उन्हें घंटों कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया जाता है (डिजिटल अरेस्ट) और केस रफा-दफा करने के नाम पर करोड़ों की ठगी की जाती है।

पुलिस की अपील: किसी भी अंजान वीडियो कॉल से न डरें। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या जुर्माने की बात नहीं करती। संदेह होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।

  • Related Posts