कांग्रेस का वोट बढ़ाने या घटाने आये थे राहुल गांधी? दो हजार लोग भी नहीं जुटे, जिसकी जयंती उसका नाम भी नहीं बोल पाये

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और तमाम पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुट गयी है. चुनाव सामने है, लिहाजा कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 20 दिनों में दूसरी दफे पटना के दौरे पर पहुंचे. लेकिन 5 फरवरी यानि आज हुए राहुल गांधी के कार्यक्रम से कई सवाल खड़े हो गये हैं. सवाल ये कि राहुल गांधी के दौरे से बिहार में कांग्रेस मजबूत हो रही है या फिर उसके पूरी तरह से रसातल में पहुंच जाने का साफ संकेत मिल रहा है. पटना में आज राहुल गांधी के कार्यक्रम से कांग्रेस की भारी फजीहत हो गयी है.

जिसकी जयंती उसका ही नाम पता नहीं

राहुल गांधी आज पटना में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्व. जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था. छपरा के पासी जाति के परिवार में जन्मे जगलाल चौधरी ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी. वे चार दफे बिहार सरकार में मंत्री बनाये गये थे. आज उनकी 130वीं जयंती थी. उनके जयंती पर पहली दफे कांग्रेस ने किसी बड़े समारोह का आयोजन किया था.

लेकिन हद तो तब हुई जब राहुल गांधी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित जगलाल चौधरी जयंती समारोह में भाषण देने के लिए खड़े हुए. मंच पर लगे बैनर पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा जगलाल चौधरी जयंती समारोह. लेकिन राहुल गांधी ने जगत चौधरी को श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया. अपने भाषण में उन्होंने स्व. जगलाल चौधरी को तीन बार जगत चौधरी कहा. राहुल गांधी की इस गलती को तो दो बार लोगों ने सुन लिया. लेकिन जब वे तीसरी बार भी जगत चौधरी के योगदान  की चर्चा करने लगे तो हॉल में मौजूद लोगों को चिल्ला कर बोलना पड़ा कि जगत चौधरी नहीं जगलाल चौधरी की जयंती है. इसके बाद राहुल गांधी ने नाम सुधारा.

ऐसा था भीड़ का आलम

अब ये भी जानिये कि जगलाल चौधरी के जयंती समारोह में राहुल गांधी को सुनने के लिए कितनी भीड़ जुटी. पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल की क्षमता करीब 1700 सीट की है. सुरक्षा कारणों से कुछ सीटें खाली करायी गयी थी. करीब एक सौ मीडियाकर्मी हॉल में मौजूद थे. फिर कभी श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल की कुछ कुर्सियां खाली पड़ी थी.

लेकिन सबसे दिलचस्प नजारा श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल के बाहर दिखा. दरअसल कांग्रेसियों को लगा था कि राहुल गांधी के नाम पर भारी भीड़ जुटेगी. सारे लोग हॉल में बैठ नहीं पायेंगे. लिहाजा, श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल के बाहर उसी परिसर में बड़ा एलईडी स्क्रीन लगाया गया था. स्क्रीन के सामने ढेर सारी कुर्सियां लगायी गयी थीं, जिस पर मंच पर चल रही गतिविधियों को दिखाया जा रहा था. लेकिन आलम ये था कि जब राहुल गांधी का भाषण चल रहा था जो उस स्क्रीन के सामने एक भी आदमी बैठा नहीं था. सारी कुर्सियां खाली पड़ी थीं.

किसने भद्द पिटवायी

इससे पहले 18 जनवरी को राहुल गांधी पटना आये थे. कुछ एनजीओ और मुस्लिम संगठनों ने संविधान सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन किया था. उस कार्यक्रम का आयोजन पटना के सबसे बड़े हॉल बापू सभागार में किया गया था. राहुल के इस कार्यक्रम में करीब 5 हजार की क्षमता वाला हॉल पूरा भरा हुआ था. जबकि आयोजकों ने सिर्फ पास पर एंट्री देने की व्यवस्था रखी थी. हॉल के बाहर भी ढेर सारे लोग थे.

लेकिन कांग्रेस के जगलाल चौधरी जयंती समारोह में भद्द पिट गयी. इससे बिहार में कांग्रेस की जमीनी हकीकत भी सामने आयी. करीब तीन दशक से कांग्रेस बिहार में आरजेडी की पिछलग्गू पार्टी बनी हुई है. बीच में एक-दो प्रदेश अध्यक्षों ने पार्टी को आरजेडी की लाइन से अलग करने की कोशिश की. लेकिन, हश्र ये हुआ कि पार्टी ने अपने अध्यक्ष को ही चलता कर दिया. लिहाजा, बिहार के सियासत के हकीकत ये है कि कांग्रेस पूरी तरह से आरजेडी के जनाधार पर राजनीति कर रही है.

बिहार कांग्रेस में गुटबाजी भी राहुल गांधी के कार्यक्रम में झलक गयी. कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं को भीड़ लाने का टारगेट दे रखा था. लेकिन ज्यादातर नेता इस उम्मीद में बैठे रह गये कि दूसरा नेता तो भीड़ लेकर आ ही रहा है. ऐसे में राहुल गांधी के कार्यक्रम की भद्द पिट गयी.

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