
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में उनके पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए, उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाई और सम्मानपूर्वक सदन तक लेकर गए। बताया जा रहा है कि इस्तीफे के बाद भी भाजपा के कई सांसद उनके आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात कर चुके थे।
संसद परिसर में शक्ति प्रदर्शन, मकर द्वार पर जुटे एनडीए सांसद
धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने से पहले ही एनडीए के कई सांसद मकर द्वार पर एकत्र हो गए थे। जैसे ही वह संसद परिसर में पहुंचे, सांसदों ने नारेबाजी करते हुए उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें विशेष पगड़ी पहनाकर एकजुटता और समर्थन का संदेश दिया गया। इसे पार्टी की ओर से उनके प्रति सम्मान और समर्थन के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्ष ने किया विरोध, लगाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
उधर, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्लेकार्ड लहराए और नारेबाजी की। उन्होंने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया और “शिक्षा चोरी” जैसे नारे लगाए। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल रहीं।
लोकसभा में पेश हुआ सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक
इसी बीच लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। हालांकि, विपक्ष के हंगामे और लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
चार घंटे होगी विधेयक पर चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया है। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या सहित कई युवा सांसद सरकार का पक्ष रखेंगे। वहीं जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना, एनसीपी, अपना दल और एलजेपी (रामविलास) समेत एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के सांसद भी बहस में हिस्सा लेंगे।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार का बड़ा कदम
देशभर में NEET-UG पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ा रही है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार संबंधी सुझाव सरकार को सौंपेगी।


