बिहार में ‘गैस माफिया’ पर DGP का हंटर! 293 सिलेंडर जब्त, 12 तस्कर गिरफ्तार; अररिया का फारबिसगंज बना अवैध भंडारण का ‘हब’

HIGHLIGHTS: ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

  • बड़ा एक्शन: DGP विनय कुमार के आदेश पर पूरे बिहार में जमाखोरों के खिलाफ महा-अभियान।
  • स्ट्राइक रेट: 10 FIR दर्ज, 293 LPG सिलेंडर जब्त और 12 शातिर गिरफ्तार।
  • अररिया में रिकॉर्ड: अकेले फारबिसगंज से 261 सिलेंडर बरामद; पुलिस ने तोड़ी सिंडिकेट की कमर।
  • कृत्रिम किल्लत: आम जनता को परेशान कर ऊंचे दामों पर गैस बेचने की थी बड़ी साजिश।

📊 क्राइम फाइल: जिलावार छापेमारी का ‘स्कोरकार्ड’

जिला

थाना क्षेत्र

जब्ती (सिलेंडर)

गिरफ्तारी

अररिया

फारबिसगंज

261

02

बेगूसराय

लाखो

11

01

मुजफ्फरपुर

मिठनपुरा

07

01

शिवहर

शिवहर

06

02

सारण

हरिहरनाथ + नगर

07

04

मधेपुरा

सिंहेश्वर स्थान

01

01

सीवान/कटिहार

मुफस्सिल/सहायक

FIR दर्ज

जांच जारी

कुल योग

पूरा बिहार

293

12

पटना | 18 फरवरी, 2026

​बिहार में रसोई गैस की ‘कृत्रिम किल्लत’ पैदा कर आम आदमी की जेब काटने वाले गैंग पर पुलिस ने काल बनकर धावा बोला है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार की गंभीरता के बाद सभी जिलों की पुलिस ने जमाखोरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पैजावा से लेकर फारबिसगंज तक, पुलिस ने उन गोदामों को खंगाला जहाँ ‘नीले और लाल’ सिलेंडरों का अवैध साम्राज्य बसाया गया था।

DGP का आदेश और ‘एक्शन मोड’ में पुलिस

​हाल के दिनों में खबरें आ रही थीं कि सिलेंडर की सप्लाई होने के बावजूद उपभोक्ताओं को ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड दिखाया जा रहा है।

  1. खुफिया इनपुट: पुलिस को जानकारी मिली कि सिलेंडर को ब्लैक मार्केट में बेचने के लिए अवैध ठिकानों पर डंप किया जा रहा है।
  2. फारबिसगंज में ‘महा-जब्ती’: अररिया जिले की पुलिस ने जब फारबिसगंज में छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। एक ही जगह से 261 सिलेंडर बरामद होना यह बताता है कि यह सिंडिकेट कितना बड़ा है।
  3. मुजफ्फरपुर से मधेपुरा तक धड़पकड़: मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा और बेगूसराय के लाखो थाने में भी बड़ी सफलता मिली, जहाँ अवैध रिफिलिंग और भंडारण का खेल चल रहा था।

VOB का नजरिया: क्या ‘खाली सिलेंडर’ की आड़ में भरा जा रहा है भ्रष्टाचार का जहर?

​बिहार में रसोई गैस की कालाबाजारी कोई नई बात नहीं है, लेकिन 293 सिलेंडरों की एक साथ बरामदगी यह साबित करती है कि यह खेल जिला स्तर पर नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए हो रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि केवल डिलीवरी बॉय या छोटे दुकानदारों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। पुलिस को उन गैस एजेंसी मालिकों और सप्लाई चेन के बड़े खिलाड़ियों पर हाथ डालना होगा जो इस ‘कृत्रिम किल्लत’ के असली मास्टरमाइंड हैं। जनता को चाहिए कि वे निर्धारित दर से एक रुपया भी ज्यादा न दें और अवैध वसूली की जानकारी सीधे हेल्पलाइन पर साझा करें।

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