HIGHLIGHTS:
- कड़ी कार्रवाई: बालू घाट सरेंडर करने वाली कंपनियों और उनके मालिकों की ‘नो एंट्री’; दोबारा नहीं मिलेगा टेंडर।
- राजस्व का रिकॉर्ड: चालू वित्तीय वर्ष में 3800 करोड़ का लक्ष्य; 3000 करोड़ का खजाना पहले ही भरा।
- नया नियम: बाहर से आने वाले खनिज वाहनों पर ‘ट्रांजिट पास’ (TP) अनिवार्य; ₹85 प्रति घन फीट लगेगा चार्ज।
- सम्मान: अवैध खनन पकड़ाने वाले 71 ‘बिहारी योद्धा’ पुरस्कृत; नाम रखे गए गुप्त।
माफियाओं की ‘स्मार्ट’ चाल पर सरकार का पलटवार: अब नहीं चलेगी मनमानी
पटना: बिहार में बालू के खेल को सरकार ने अब ‘आर-पार’ की लड़ाई बना लिया है। डिप्टी सीएम सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज पटना में प्रेस वार्ता के दौरान उन कंपनियों को खुली चेतावनी दी है जो भारी बोली लगाकर घाट लेते हैं और फिर मुनाफा न होने का बहाना बनाकर बीच में ही भाग जाते हैं। सरकार ने ऐसी 78 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
[क्यों भागे ठेकेदार? माफिया और सख्ती का टकराव]
डिप्टी सीएम ने खुलासा किया कि कई ठेकेदारों ने इस उम्मीद में ऊंची बोली लगाई थी कि वे ‘अवैध खनन’ के जरिए पैसा बना लेंगे। लेकिन:
- सख्ती: विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड और सीसीटीवी निगरानी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
- सरेंडर: जब अवैध कमाई का रास्ता बंद हुआ, तो उन्होंने ‘घाटा’ बताकर घाट सरेंडर कर दिए।
- सजा: अब ऐसी कंपनियों के निदेशक या मालिक किसी भी नए टेंडर में शामिल नहीं हो सकेंगे।
बार्डर पर ‘पहरा’ और ट्रांजिट चालान का ‘चाबुक’
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब बिहार में बाहर से आने वाले बालू और गिट्टी लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान (TP) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
- रेट: ₹85 प्रति घन फीट की दर से देना होगा चार्ज।
- निगरानी: सीमावर्ती जिलों के प्रवेश मार्ग पर CCTV कैमरों से सशक्त मॉनिटरिंग होगी।
- कड़ाई: बिना टीपी के प्रवेश करने वाले वाहनों को ‘अवैध’ मानकर जब्त किया जाएगा।
पहली बार वृहद खनिज की नीलामी: गया और रोहतास में हलचल
बिहार अब सिर्फ बालू तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य में पहली बार वृहद खनिजों के खनन की प्रक्रिया शुरू हुई है:
- गया: निकेल और क्रोमियम के दो खनिज ब्लॉक का टेंडर फाइनल।
- रोहतास: ग्लूकोनाईट ब्लॉक का कंपोजिट लाइसेंस जारी।
- पत्थर खनन: राज्य में बंद पड़े पत्थर खनन कार्यों को भी ‘कंट्रोल्ड’ तरीके से फिर शुरू किया जाएगा।
71 ‘बिहारी योद्धा’ और 31 हजार छापेमारी
अवैध खनन के खिलाफ सरकार ने जनता को भी अपना हथियार बनाया है।
”हमने आज 71 ऐसे जांबाज नागरिकों (बिहारी योद्धाओं) को सम्मानित किया है, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अवैध खनन की जानकारी दी। इनके नाम गुप्त रखे गए हैं ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।” — विजय कुमार सिन्हा (उप-मुख्यमंत्री)
आंकड़ों की गवाही: अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच 31,297 छापेमारी की गई, 1600 FIR दर्ज हुई और 400 लोगों को जेल भेजा गया।
VOB का नजरिया: ब्लैकलिस्टिंग से क्या थमेगा अवैध खनन?
सरकार की यह पहल सराहनीय है कि वह ‘सरेंडर करने वाली’ फर्जी कंपनियों पर लगाम लगा रही है। राजस्व का 3800 करोड़ का लक्ष्य छूना विभाग की बड़ी उपलब्धि है। लेकिन असली चुनौती उन 8 जिलों के खनन पदाधिकारियों (DMO) की है जिन्हें शोकॉज किया गया है। जब तक विभाग के अंदर बैठे ‘विभीषण’ साफ़ नहीं होंगे, तब तक केवल ‘बिहारी योद्धाओं’ के भरोसे माफियाराज खत्म करना मुश्किल होगा। ट्रांजिट पास का निर्णय सीमावर्ती इलाकों में गिट्टी-बालू की कीमतों में उछाल ला सकता है, जिस पर नजर रखनी होगी।


