पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही जारी रही। आज स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवालों पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों ने भी सरकार से तीखे सवाल पूछे। इसी दौरान सहरसा से इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने ऐसा सवाल उठा दिया, जिसका जवाब अंततः उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को देना पड़ा।
“दो साल में जमीन हस्तांतरण, कॉलेज कब खुलेगा?”
विधायक आईपी गुप्ता ने कहा कि उन्होंने सहरसा में मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर सवाल पूछा था। सरकार की ओर से जवाब तो मिला, लेकिन वह संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा—
“2023 में मेडिकल कॉलेज खोलने का अप्रूवल मिला था, लेकिन जमीन का हस्तांतरण 2025 में हुआ। इस प्रक्रिया में पूरे दो साल लग गए।”
उन्होंने आगे पूछा कि सहरसा सदर अस्पताल के पास 21 एकड़ जमीन और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। ऐसे में क्या सरकार अस्थायी तौर पर सदर अस्पताल परिसर में ही मेडिकल कॉलेज शुरू करने का विचार रखती है? साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पीपीपी मोड में कॉलेज खोलने की प्रक्रिया कब शुरू होगी और इसका मॉडल क्या होगा।
मंत्री नहीं दे सके जवाब, डिप्टी सीएम ने संभाली कमान
विधायक के इन सवालों का जवाब विभागीय मंत्री ठीक से नहीं दे पाए। इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार की ओर से मोर्चा संभालते हुए कहा कि सरकार भी इस विषय को लेकर गंभीर है।
उन्होंने बताया—
“मधेपुरा में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया गया है, लेकिन वहां डॉक्टर पदस्थापन के बाद भी जाना नहीं चाहते। इसलिए सरकार नई नीति बनाने जा रही है, जिसके तहत सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
जमीन की दोबारा होगी समीक्षा
सम्राट चौधरी ने कहा कि सहरसा सदर अस्पताल की जमीन का पहले भी निरीक्षण किया गया है। वह खुद और मुख्यमंत्री भी वहां जाकर स्थिति का जायजा ले चुके हैं।
“यदि सदस्य चाहते हैं तो फिर से समीक्षा कराई जाएगी कि उक्त भूमि पर मेडिकल कॉलेज बनाना उपयुक्त होगा या नहीं।”
पीपीपी मोड पर सरकार कर रही विचार
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि पीपीपी मोड को लेकर सरकार नीति तैयार कर रही है। मधेपुरा मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारी सरकारी खर्च के बावजूद लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है, इसलिए निजी भागीदारी के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा—
“सरकार इतना निवेश कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण जनता को लाभ नहीं मिल रहा। इसलिए पीपीपी मोड एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।”
इस जवाब के बाद सदन में इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।


