​बिहार में जमीन विवादों पर डिप्टी CM का बड़ा ऐलान: एक जैसी शिकायतों पर अलग-अलग फैसला नहीं; ‘जमीन और जमीर’ बचाने उतरी सरकार

पटना | 11 फरवरी – बिहार में जमीन विवादों के कारण अब तक न जाने कितना खून बहा है, लेकिन अब सरकार ‘जमीन और जमीर’ दोनों को बचाने के एक्शन मोड में आ गई है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ के मंच से अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि ‘एक ही प्रकृति (नेचर) की शिकायतों पर अब अलग-अलग फैसला नहीं लिया जाएगा।’ इस कड़े निर्देश के बाद अंचल से लेकर जिला स्तर तक के उन अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगेगी, जो चेहरे और रसूख देखकर एक ही मामले में अलग-अलग आदेश पारित कर देते थे।

खबर की 3 सबसे बड़ी बातें:

  • कड़ा निर्देश: एक जैसे जमीन विवादों में अधिकारियों को एक समान फैसला देना होगा, मनमानी खत्म होगी।
  • आंकड़ों में पेंडेंसी: 46 लाख आवेदनों में से 40 लाख सिर्फ परिमार्जन और नाम सुधार के लिए पेंडिंग हैं।
  • विपक्ष भी मुरीद: सरकार के इस ‘जनकल्याण संवाद’ की तारीफ विधान परिषद के सभापति के साथ-साथ विपक्षी दल (RJD) के नेताओं ने भी की है।

‘जमीन की बीमारी’ पकड़ने खुद उतर रहे बड़े अधिकारी

​उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि बिहार में जमीन की समस्या बेहद जटिल है। यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि लोगों के जमीर और भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।

इस समस्या के जड़ से खात्मे के लिए अब विभाग के प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी ‘जनकल्याण संवाद’ से ठीक एक दिन पहले खुद जिलों में पहुंचकर वहां की जमीनी हकीकत और ‘बीमारी’ का आंकलन कर रहे हैं। संवाद कार्यक्रम में अमीन, राजस्व कर्मचारी, CO, DCLR, ADM, DM से लेकर कमिश्नर तक को एक ही मंच पर बैठाकर ऑन-द-स्पॉट समस्याओं का निपटारा किया जा रहा है।

40 लाख किसान परिमार्जन के फेर में फंसे, नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

​राजस्व महा-अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों ने सिस्टम की पोल भी खोली है और सरकार के सामने चुनौती भी रखी है।

  • ​विभाग को कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।
  • ​इनमें से सबसे बड़ा आंकड़ा—लगभग 40 लाख आवेदन—केवल ‘परिमार्जन’ (Land Record Rectification) और नाम सुधार से जुड़े हैं। डिप्टी सीएम ने चिंता जताते हुए कहा कि परिमार्जन के मामले लंबित रहने के कारण बिहार के लाखों किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य ‘परिमार्जन प्लस’ के तहत इन 40 लाख आवेदनों को जल्द से जल्द क्लीयर करना है।

पारदर्शिता के लिए अंचलवार काउंटर, तय हो रही समय-सीमा

​कार्य में पूरी पारदर्शिता रहे, इसके लिए कार्यक्रम में अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए जा रहे हैं। इसमें उसी अंचल के साथ-साथ दूसरे अंचलों के अधिकारियों को भी क्रॉस-चेकिंग के लिए बैठाया जा रहा है। अब तक प्राप्त 8363 शिकायतों में से 2414 का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया जा चुका है और बाकी के लिए सख्त टाइमलाइन तय की गई है।

राजद नेता ने भी की सरकार की इस पहल की तारीफ

​जमीन के मामलों में आई इस तेजी और पारदर्शिता का लोहा विपक्ष भी मान रहा है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने जहां इसे ‘अत्यंत लोकप्रिय संवाद’ करार दिया, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एमएलसी डॉ. सुनील कुमार सिंह ने भी उपमुख्यमंत्री की इस पहल की खुलकर प्रशंसा की है। राजनीति से ऊपर उठकर मिल रही इस तारीफ से साफ है कि यह पहल आम जनता के सीधे सरोकार की है।

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