समाचार के मुख्य बिंदु: युद्ध की विभीषिका में खो गया भागलपुर का होनहार इंजीनियर
- दुखद वापसी: ईरान युद्ध के शिकार हुए सन्हौला (भागलपुर) निवासी इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर एक से दो दिनों के भीतर भागलपुर पहुँचेगा।
- विमान से सफर: शव को विशेष विमान के जरिए भागलपुर लाया जा रहा है; शव को वापस लाने की राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
- अंतिम विदाई: भागलपुर के ऐतिहासिक बरारी श्मशान घाट पर पूरे रीति-रिवाज के साथ किया जाएगा अंतिम संस्कार।
- पारिवारिक शोक: मृतक के मामा ससुर और कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा ने दी जानकारी; शोक संतप्त परिवार भागलपुर में ही है मौजूद।
- VOB इनसाइट: रोजी-रोटी की तलाश में सात समंदर पार गए बिहार के युवाओं के लिए युद्ध की ये खबरें किसी वज्रपात से कम नहीं हैं।
भागलपुर | 26 मार्च, 2026
भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के लिए अत्यंत पीड़ादायक और शोकपूर्ण खबर है। ईरान में चल रहे युद्ध की आग ने सन्हौला के एक होनहार बेटे, इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह को हमेशा के लिए हमसे छीन लिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की विभीषिका का शिकार हुए इस प्रतिभावान इंजीनियर का पार्थिव शरीर अब अंतिम सफर पर अपने घर लौट रहा है। अगले 24 से 48 घंटों के भीतर उनका शव भागलपुर पहुँचने की संभावना है।
हवाई मार्ग से पहुँचेगा शव: कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा ने दी जानकारी
देवनंदन सिंह के मामा ससुर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा ने अत्यंत भारी मन से मीडिया को जानकारी दी कि उनके पार्थिव शरीर को भागलपुर लाने की सभी आवश्यक कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
मुख्य अपडेट:
- परिवहन: देवनंदन प्रसाद सिंह का शव विमान के जरिए भागलपुर लाया जाएगा। विदेशी धरती पर हुई इस अनहोनी के बाद शव को देश वापस लाने में दूतावास और स्थानीय प्रशासन ने समन्वय बिठाया है।
- समय सीमा: संभावना जताई जा रही है कि कल शाम या परसों सुबह तक शव भागलपुर की धरती पर पहुँच जाएगा।
- प्रशासनिक मुस्तैदी: इंजीनियर के सम्मान और उनके परिजनों की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अंतिम संस्कार की तैयारी: बरारी घाट बनेगा साक्षी
प्रवीण सिंह कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि इंजीनियर देवनंदन सिंह का अंतिम संस्कार सन्हौला के पैतृक गांव के बजाय भागलपुर शहर में ही करने का निर्णय लिया गया है, ताकि सभी संबंधी और शुभचिंतक अंतिम विदाई दे सकें।
- स्थान: भागलपुर के प्रसिद्ध बरारी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
- शोक संतप्त परिवार: देवनंदन सिंह के माता-पिता, पत्नी और बच्चों सहित परिवार के तमाम लोग इस समय भागलपुर में ही मौजूद हैं। घर में कोहराम मचा हुआ है और आसपास के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुँच रहे हैं।
- श्रद्धांजलि: बरारी घाट पर होने वाले अंतिम संस्कार में जिले के कई गणमान्य व्यक्तियों और राजनैतिक हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।
VOB का नजरिया: युद्ध की कीमत और प्रवासी युवाओं का दर्द
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि देवनंदन सिंह की मौत केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बिहारी युवाओं के जोखिम भरे जीवन को भी दर्शाती है जो बेहतर भविष्य के लिए अशांत क्षेत्रों में काम करने को मजबूर हैं।
- राजनयिक सुरक्षा: केंद्र और राज्य सरकार को विदेशों में, विशेषकर युद्धग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स की सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी चाहिए।
- सहायता की मांग: सन्हौला के लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
- समाज की क्षति: एक प्रतिभावान इंजीनियर का इस तरह असमय चले जाना भागलपुर के बौद्धिक और तकनीकी समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
अंतिम विदाई की प्रतीक्षा में सजल आंखें
भागलपुर अब अपने लाडले बेटे की आखिरी झलक पाने और उसे सम्मानजनक विदाई देने की प्रतीक्षा कर रहा है। ईरान से भागलपुर तक का यह सफर देवनंदन सिंह के जीवन का अंतिम सफर होगा, लेकिन उनकी यादें सन्हौला और भागलपुर के लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ शव के पहुँचने की सटीक जानकारी और अंतिम संस्कार की पल-पल की अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


