नालंदा में इंटर परीक्षा के पहले दिन हंगामा
नालंदा। बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन नालंदा जिले में भावुक और तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। बिहार शरीफ के सोहसाराय स्थित किसान कॉलेज परीक्षा केंद्र पर महज 2 मिनट लेट पहुंची छात्रा को प्रवेश नहीं मिला। गेट बंद होते ही छात्रा सड़क पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अभिभावक और राहगीर भी भावुक हो गए।
जाम में फंसी ऑटो, 2 मिनट देरी बनी वजह
छात्रा के परिजनों का कहना है कि वह समय से घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में ट्रैफिक जाम के कारण ऑटो फंस गया। जब वह परीक्षा केंद्र पहुंची तो घड़ी में सिर्फ 9:02 बजे थे, लेकिन गेट बंद कर दिया गया था।
छात्रा का कहना था—
“बस दो मिनट देर हो गई… मुझे अंदर जाने देते तो मेरा साल बर्बाद नहीं होता।”
नियम सबके लिए समान क्यों नहीं?
इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया, जब आरोप लगा कि एसएस बालिका स्कूल परीक्षा केंद्र पर एक महिला शिक्षिका को 9:10 बजे के बाद भी प्रवेश दे दिया गया, जबकि छात्राओं को 9:00 के बाद सख्ती से रोक दिया गया।
अभिभावकों ने सवाल उठाया—
“अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो शिक्षकों को देर से एंट्री क्यों और बच्चों को क्यों नहीं?”
एडमिट कार्ड में था सख्त निर्देश
बिहार बोर्ड द्वारा जारी एडमिट कार्ड में साफ लिखा है कि
“सुबह 9:00 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा।”
इसी नियम का हवाला देकर केंद्र प्रशासन ने छात्राओं को अंदर जाने से रोक दिया।
कई केंद्रों पर दिखा दोहरा रवैया
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा लेने वाले कर्मी खुद देर से पहुंचे, लेकिन उन्हें प्रवेश मिल गया, जबकि छात्र-छात्राओं को बाहर रोक दिया गया। इससे अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया।
प्रशासन से जांच की मांग
घटना के बाद अभिभावकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य बनाने आए बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार अमानवीय है।
इधर, छात्रा की आंखों के आंसू और सड़क पर बैठकर किया गया विलाप इस बात की गवाही दे रहा था कि सिर्फ दो मिनट की देरी भी किसी का पूरा साल बिगाड़ सकती है।


