दिल्ली की लापरवाही ने छीना समस्तीपुर का लाल: खुले गटर में गिरकर मजदूर बिरजू की दर्दनाक मौत; बेसहारा हुए 3 मासूम बच्चे और बूढ़ी मां

रोहिणी (बेगमपुर) का दर्दनाक हादसा: 10 साल की उम्र में उठा था पिता का साया, अब परिवार का इकलौता सहारा भी छिना; परिजनों ने लगाई मुआवजे की गुहार

द वॉयस ऑफ बिहार (समस्तीपुर/नई दिल्ली)

​देश की राजधानी दिल्ली में सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही ने बिहार के एक गरीब परिवार का सबकुछ छीन लिया। रोहिणी सेक्टर-32 (बेगमपुर इलाके) में DDA की खाली जमीन पर बने एक खुले मेनहोल (गटर) में गिरकर समस्तीपुर के एक 32 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान वारिसनगर थाना क्षेत्र के शादीपुर बथनाहा (वार्ड 13) निवासी स्वर्गीय जुगल राय के पुत्र बिरजू राय के रूप में हुई है। इस मनहूस खबर के गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में मातम पसर गया है।

हादसे की रात क्या हुआ था?

  • खुला था मौत का मुंह: बताया जा रहा है कि बिरजू रात के समय अपने एक साथी के साथ लौट रहा था। तभी अंधेरे में संतुलन बिगड़ने से वह सीधे खुले गटर में जा गिरा।
  • मंगलवार को मिला शव: पुलिस को मंगलवार को इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद गटर से उसका शव बरामद किया गया। यह दिल्ली प्रशासन की एक ऐसी लापरवाही है, जिसकी कीमत एक गरीब मजदूर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

बचपन में पिता को खोया, अब बूढ़ी मां का छिना सहारा

​बिरजू की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण रही है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल पहले, जब बिरजू महज 10 साल का था, तभी उसके पिता जुगल राय का निधन हो गया था।

  • कम उम्र में उठाया बोझ: घर की माली हालत खराब होने के कारण उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई और किशोर उम्र में ही वह रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली चला गया था।
  • बूढ़ी मां का दर्द: जिस मां ने पति की मौत के बाद मजदूरी कर बेटे को पाला-पोसा, आज वह फिर बेसहारा हो गई हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है— “पहले पति का सहारा छिना, अब बेटा भी चला गया। बुढ़ापे में अब किसके भरोसे जिएंगी?”

बिलखती पत्नी का सवाल: “मेरे तीन छोटे बच्चों का क्या होगा?”

​बिरजू अपने पीछे पत्नी सुचिता और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गया है। परिवार की आय का एकमात्र जरिया वही था।

  • आखिरी बातचीत: रोती-बिलखती पत्नी सुचिता ने बताया कि घटना वाले दिन दिन में ही उनकी बिरजू से बात हुई थी। उसे उस दिन 5 हजार रुपये की मजदूरी भी मिली थी।
  • जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं: सुचिता के मुताबिक, बिरजू 8 साल से दिल्ली में ही रहकर मजदूरी कर रहा था (8 महीने पहले वह गांव से वापस दिल्ली गया था)। गांव में घर छोड़कर खेती-बाड़ी के लिए कोई जमीन भी नहीं है। सुचिता का एक ही सवाल है कि अब बिना किसी सहारे के उसके तीन छोटे बच्चों का लालन-पालन कैसे होगा?

मुआवजे की मांग: इस हृदयविदारक घटना के बाद ग्रामीणों और शोकाकुल परिजनों ने सरकार से मांग की है कि दिल्ली की लापरवाही से हुई इस मौत पर पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और सरकारी सहायता प्रदान की जाए।

  • Related Posts

    भागलपुर में सेमिनार: 1857 की क्रांति से 80 साल पहले ही जलाई थी आजादी की चिंगारी; अंग्रेजों का खजाना लूटकर गरीबों में बांटते थे ‘रॉबिनहुड’ तिलका मांझी

    Share Add as a preferred…

    Continue reading