बिहार के ‘बाहुबली’ IPS को दिल्ली का सलाम! अमित शाह ने बाबू राम को पहनाया वीरता का पदक; औरंगाबाद के जंगलों में नक्सलियों के छुड़ाए थे छक्के

HIGHLIGHTS:

  • बड़ा सम्मान: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने IPS बाबू राम को ‘राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक’ से नवाजा।
  • शौर्य की गाथा: 2016 में औरंगाबाद के खूंखार जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ छेड़ा था ‘ऑपरेशन क्लीन’।
  • सलाम: कोबरा कमांडो और जिला पुलिस के साथ मिलकर मौत के मुंह से नक्सलियों को खदेड़ा था।

भुवनेश्वर में गूंजा बिहार का नाम: गृह मंत्री ने थपथपाई ‘बाबू राम’ की पीठ

भुवनेश्वर (ओडिशा): ओडिशा के मुंडली में आयोजित CISF के स्थापना दिवस समारोह में आज बिहार कैडर के जांबाज IPS अधिकारी बाबू राम की वीरता की गूंज सुनाई दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं बाबू राम को ‘राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक’ (President’s Police Medal for Gallantry) से सम्मानित किया। यह पदक उनकी उस अदम्य साहस और नेतृत्व की कहानी बयां करता है, जिसने साल 2016 में बिहार के नक्सल प्रभावित इलाकों में खौफ का अंत किया था।

2016 का वो खूनी जंगल: जब SP ने खुद संभाली थी कमान

​यह कहानी 2016 की है, जब बाबू राम औरंगाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में तैनात थे। गया और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित लंगुराही और छकरबंधा के घने जंगल नक्सलियों के अभेद्य किले माने जाते थे।

  • मिशन इंपॉसिबल: नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को ललकारा था, लेकिन बाबू राम ने हार नहीं मानी।
  • संयुक्त ऑपरेशन: जिला पुलिस और कोबरा (CoBRA) कमांडो की संयुक्त टीम का नेतृत्व करते हुए बाबू राम खुद मोर्चे पर डटे रहे।
  • जंगलों में मुठभेड़: घने जंगलों, लैंडमाइंस और छिपकर वार करने वाले नक्सलियों के बीच बाबू राम ने जिस साहस का परिचय दिया, उसी का परिणाम है कि आज औरंगाबाद का वो इलाका विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।

नक्सलवाद के खिलाफ ‘बिहार मॉडल’ के नायक

​IPS बाबू राम की इस उपलब्धि पर बिहार पुलिस मुख्यालय में भी जश्न का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि बाबू राम ने हमेशा फ्रंट से लीड किया है। औरंगाबाद में उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलियों के नेटवर्क को जो चोट पहुँची थी, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। गृह मंत्री द्वारा दिया गया यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बिहार के उन हजारों पुलिसकर्मियों का है जो अपनी जान हथेली पर रखकर जंगलों में गश्त करते हैं।

VOB का नजरिया: खाकी के असली ‘हीरो’ का सम्मान!

अक्सर पुलिस की छवि नकारात्मक दिखाई जाती है, लेकिन बाबू राम जैसे अधिकारी बताते हैं कि ‘वर्दी’ की असली ताकत क्या है। जब एक कप्तान खुद जंगल की खाक छानता है और गोलियों की बौछार के बीच अपने जवानों के साथ खड़ा होता है, तो जीत निश्चित होती है। राष्ट्रपति का यह पदक बाबू राम के उस पसीने और खून की कीमत है जो उन्होंने बिहार की शांति के लिए बहाया था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस जांबाज पुलिस अधिकारी के जज्बे को सलाम करता है।

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